पंचायत के सार्वजनिक सफाई कार्य का भुगतान निजी कृषि फर्म को क्यों?
हेमलाल कृषि फर्म से पंचायत से जुड़े परिवार का संबंध होने की चर्चा, दस्तावेजों की जांच जरूरी
₹45 हजार के भुगतान की हो जांच, सामने आए प्रस्ताव से लेकर मौके तक की पूरी सच्चाई
देवभोग : गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कुम्हड़ाईखुर्द में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए ₹45 हजार के भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सफाई कार्य के नाम पर हेमलाल कृषि फर्म को ₹45,000 का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। वहीं चर्चा है कि उक्त फर्म पंचायत से जुड़े व्यक्ति के पुत्र के नाम संचालित है। ऐसे में मामला केवल भुगतान तक सीमित नहीं, बल्कि हितों के संभावित टकराव और पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
सफाई की राशि कृषि फर्म के खाते तक कैसे पहुंची?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से पंचायत के सफाई कार्य के लिए ₹45 हजार किस आधार पर स्वीकृत किए गए और उसका भुगतान कृषि फर्म के नाम क्यों किया गया? क्या पंचायत बैठक में इसका विधिवत प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या फर्म को नियमानुसार कार्यादेश दिया गया था? भुगतान से पहले कार्य का सत्यापन किसने किया?
यदि रिकॉर्ड में सफाई कार्य दर्ज है तो कहां सफाई कराई गई, कितने दिनों तक कार्य हुआ, कितने श्रमिक लगाए गए और कार्य की वास्तविक लागत कितनी थी, इसका भी खुलासा होना जरूरी है।
परिवार से संबंध है तो प्रक्रिया की जांच क्यों नहीं?
यदि हेमलाल कृषि फर्म का संचालक वास्तव में पंचायत से जुड़े किसी पदाधिकारी/प्रतिनिधि का पुत्र है, तो यह भी जांच का विषय है कि ऐसी स्थिति में भुगतान करते समय संबंधित व्यक्ति ने प्रक्रिया से स्वयं को अलग रखा था या नहीं और पंचायत के नियमों के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं का पालन किया गया था या नहीं।
मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पंचायत प्रस्ताव, स्वीकृति आदेश, कार्यादेश, बिल-वाउचर, फर्म का पंजीयन, भुगतान की बैंक जानकारी, मस्टर/कार्य विवरण और कार्य सत्यापन दस्तावेज की जांच जरूरी है।
मौके पर काम कितना, रिकॉर्ड में भुगतान कितना?
₹45 हजार का भुगतान वास्तव में जिस कार्य के लिए किया गया, उसकी मौके पर जांच भी अहम होगी। यदि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण बताया गया है तो स्थल निरीक्षण कर यह देखा जाना चाहिए कि कार्य हुआ भी है या नहीं और हुआ है तो उसकी मात्रा एवं गुणवत्ता भुगतान के अनुरूप है या नहीं।
जनपद पंचायत देवभोग और संबंधित अधिकारियों से अब मुख्य सवाल है—क्या ₹45 हजार के इस भुगतान की दस्तावेजी और स्थलीय जांच कराई जाएगी? जांच में यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है अथवा वित्तीय प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पंचायत की राशि सार्वजनिक धन है। इसलिए ₹45 हजार के इस भुगतान की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक होने और निष्पक्ष जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी।




