छात्र संगठन का अल्टीमेटम, तीन दिन करे कार्यवाही.
अनूपपुर सुरेश मिनोचा : पुष्पराजगढ़ स्थित शासकीय स्नातक महाविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र में महाविद्यालय में पदस्थ शिक्षक डॉ. धर्मेंद्र सतनामी पर छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार करने और गलत तरीके से स्पर्श करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित शिक्षक छात्राओं से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और उनकी गतिविधियों से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान एवं असहज महसूस कर रही हैं। छात्र संगठन का दावा है कि इससे पहले भी शिक्षक के खिलाफ इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। मामले को लेकर छात्र-छात्राओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संगठन ने प्रशासन से तीन दिन के भीतर जांच पूरी कर शिक्षक को निलंबित करने तथा अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। यदि कार्यवाही नहीं हुई तो आंदोलन, कॉलेज घेराव और चक्का जाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
शिक्षक पर छात्रा से अनुचित व्यवहार का आरोप
महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्रा से जुड़े इस मामले ने शिक्षा जगत को झकझोर दिया है। छात्र संगठन द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित शिक्षक छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं और गलत स्पर्श जैसी हरकतें करते हैं। शिकायत के अनुसार इस तरह की घटनाओं से छात्राएं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। छात्र संगठन का कहना है कि शिक्षा संस्थान छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए होते हैं, लेकिन यदि शिक्षक ही विवादों में घिर जाएं तो यह पूरे शैक्षणिक माहौल पर सवाल खड़े करता है। संगठन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच और कानूनी कार्यवाही की मांग की है।
छात्र संगठन का अल्टीमेटम, तीन दिन करे कार्यवाही
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तीन दिनों के भीतर आरोपी शिक्षक के खिलाफ ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। शिकायत पत्र की प्रतिलिपि उच्च शिक्षा विभाग, कलेक्टर, विधायक, सांसद और पुलिस प्रशासन को भी भेजी गई है। संगठन का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठन ने शिक्षक को तत्काल निलंबित करने और जांच पूरी होने तक महाविद्यालय से दूर रखने की मांग की है। इससे कॉलेज परिसर में चर्चा और तनाव का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें महाविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिक गई हैं। छात्र संगठन का आरोप है कि पहले भी संबंधित शिक्षक के खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि पूर्व में शिकायतें थीं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। जांच शुरू होने के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला छात्राओं की सुरक्षा, महाविद्यालय की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बड़ा मुद्दा बन गया है।



