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श्रीमद् भागवत कथा में बाल-कृष्ण लीलाओं की मनोहारी प्रस्तुति ने भक्तों को किया भाव-विभोर

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नामकरण संस्कार, पूतना वध एवं उखल बंधन लीला की सजीव झांकियों ने बांधा समां

कोरबा:श्रीधाम वृंदावन से पधारे परम पूज्य कथा व्यास श्री रामनाथ तिवारी जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण की बाल्य लीलाओं का अत्यंत मनोहारी एवं सजीव प्रस्तुतीकरण किया गया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार, पूतना वध तथा उखल बंधन (दामोदर) लीला की आकर्षक एवं भावपूर्ण झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महाराज श्री ने अपने मधुर, भक्तिरस से ओतप्रोत प्रवचनों में कहा कि भगवान की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीव के कल्याण और भक्ति के गूढ़ रहस्यों को प्रकट करने वाली दिव्य लीलाएं हैं। उन्होंने बताया कि गोकुल में भगवान के नामकरण संस्कार के साथ ही समस्त ब्रजभूमि आनंद और उत्साह से भर उठी थी तथा स्वयं देवताओं ने भी इस दिव्य अवतरण का अभिनंदन किया था।

पूतना वध प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और कृपा की कोई सीमा नहीं है। विषपान कराने के उद्देश्य से आई राक्षसी पूतना को भी प्रभु ने माता का पद प्रदान कर मोक्ष प्रदान किया। यह भगवान के असीम प्रेम, दया, करुणा और शरणागत वत्सलता का अद्भुत उदाहरण है। वहीं उखल बंधन लीला का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जिनके उदर में अनंत ब्रह्मांड समाहित हैं, वही भगवान माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम के कारण उखल से बंध जाते हैं। यह लीला दर्शाती है कि भगवान शक्ति से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों के प्रेम बंधन में स्वयं को समर्पित कर देते हैं।

कथा के साथ प्रस्तुत की गई सजीव एवं मनोहारी झांकियों ने श्रद्धालुओं को साक्षात वृंदावन और गोकुल की अनुभूति कराई। बाल गोपाल की मोहक छवि, उनकी नटखट अदाएं, माखन चोर स्वरूप, मातृ वात्सल्य तथा भक्तों के प्रति उनका प्रेम देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत प्रत्येक प्रसंग में भगवान की करुणा, प्रेम और दिव्यता का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

संपूर्ण कथा पंडाल भक्तिमय एवं संगीतमय वातावरण से गुंजायमान रहा। ठाकुरजी एवं श्री राधारानी की महिमा का गुणगान करते हुए प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। हरिनाम संकीर्तन, राधे-राधे के जयघोष तथा श्रीकृष्ण भक्ति से ओतप्रोत भजनों ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु स्वयं को वृंदावन की रज में उपस्थित अनुभव करने लगे। “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण”, “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम” और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों से संपूर्ण कथा स्थल कृष्णमय हो उठा।

शिव काली मंदिर, बलगीनगर के पुजारी श्री मोनू महाराज की धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती रितु दुबे की पावन स्मृति में आयोजित यह संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया है। कथा व्यास महाराज जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भगवान की कृपा प्राप्त करने का सरलतम माध्यम है तथा जो व्यक्ति श्रद्धा और प्रेमपूर्वक ठाकुरजी की लीलाओं का श्रवण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण एवं श्री राधारानी की दिव्य लीलाओं का रसास्वादन कर स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे हैं।

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