Home आस्था इस मंदिर में काल भैरव को लगाया जाता है शराब का भोग!...

इस मंदिर में काल भैरव को लगाया जाता है शराब का भोग! जाने क्या है मान्यता…..

0

देश में कई प्राचीन और रहस्मयी मंदिर हैं, जहां की पूजा परंपराएं और भोग प्रसाद अलग-अलग है. आमतौर पर देश के ज्यादातर मंदिरों में भगवान को फल, लड्डू, पेड़े, बर्फी, नारियल आदि का भोग अर्पित किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं देश का एक मंंदिर ऐसा भी है, जहां भगवान को ये सब चीजें नहीं, बल्कि शराब का भोग अर्पित किए जाने की पंरपरा चली आ रही है हम बात कर रहे हैं बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर की. यहां भगवान काल भैरव को मिठाई या फल नहीं, बल्कि कड़क विदेशी शराब और व्हिस्की चढ़ाई जाती है. यहां आने वाले भक्त भी भगवान के चरणों में शराब की बोतलें अर्पित करते हैं. इस मंदिर का ये नजारा देखकर यहांं पहली बार आने वाले लोग दंग रह जाते हैं. उज्जैन के इस काल भैरव मंदिर की लोगों के बीच गहरी आस्था है.

तंत्र शास्त्र और तांत्रिक परंपराओं के अनुसार:- सनातन धर्म में मदिरा पान यानी शराब पीने को एक बुराई के तौर पर देखा जाता है. धार्मिक जगहों पर शराब लेकर जाने की मनाही होती है, लेकिन भगवान काल भैरव के इस मंदिर में आकर ये सारे नियम टूट जाते हैं. तंत्र शास्त्र और तांत्रिक परंपराओं के अनुसार, भगवान काल भैरव महादेव के ही उग्र रूप हैं. भगवान के इस रूप की पूजा में तामसिक चीजें जैसे शराब का भोग अत्यंत आवश्यक होता है.

प्लेट में रखी पूरी शराब गायब हो जाती है:- यही वजह है कि यहां साल के बारह महीने और चौबीसों घंटे भक्त भगवान काल भैरव को भोग में शराब ही अर्पित करते हैं. भक्तोंं द्वारा लाई गई शराब को मंदिर के पुजारी एक छोटी तश्तरी यानी प्लेट में निकालते हैं. इसके बाद उस प्लेट को बाबा काल भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाया जाता है. देखते ही देखते प्लेट की पूरी शराब गायब हो जाती है. मूर्ति के मुंह के पास कोई छेद या नली नहीं है, लेकिन फिर भी ऐसा होता है. ये आज भी मंदिर का एक बड़ा रहस्य है.भगवान काल भैरव उज्जैन नगरी के सेनापति या कोतवाल कहे जाते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाकाल की नगरी में रहने के लिए भगवान काल भैरव की अनुमति लेना जरूरी है. उज्जैन में काल भैरव के दरबार में माथा टेके बिना यात्रा कभी पूरी नहीं मानी जाती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here