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पहली बारिश में बहा 15 लाख की लागत से बना रपटा, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

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सूरजपुर: जिले के प्रतापपुर विकासखंड से एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने वाली खबर सामने आई है, जहां पहली ही मानसूनी बारिश और नदी के तेज बहाव में एक निर्माणाधीन रपटा बह गया। करोड़ों रुपये की लागत से बनी पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब लाखों रुपये के इस रपटे के बहने से PWD के सेतु संभाग और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

करोड़ों की पुलिया के बाद अब लाखों का रपटा डूबा

जानकारी के अनुसार, PWD के सेतु विभाग द्वारा धोन्धा–गोविंदपुर–रमकोला मार्ग पर आवागमन को सुचारू रूप से बहाल करने के लिए इस रपटे का निर्माण कराया जा रहा था। इसी मार्ग पर पहले बनी करोड़ों रुपये की एक पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

इस पूरे मामले में ग्रामीणों का कहना है कि रपटा लगभग पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका था और इस पर से लोगों का आवागमन भी शुरू हो गया था। विभाग का कहना है कि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था, काम चल ही रहा था कि इस बीच तेज बारिश के कारण नदी का बहाव बढ़ा और यह हादसा हो गया।

कलेक्टर ने थमाया जांच का जिम्मा

मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर कलेक्टर रैना जमील ने तत्काल एक्शन लिया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके लिए एक विशेष जांच दल का गठन भी कर दिया गया है। उनका कहना है कि जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

15 दिन पहले बना रपटा बह गया

दूसरी ओर जनपद पंचायत भैयाथान के अंतर्गत ग्राम पंचायत डबरीपारा से भी विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां गोबरी नदी पर महज 15 दिन पहले ही 15 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ रपटा पहली ही तेज बारिश और नदी के उफान में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित कार्य एजेंसी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जिला मुख्यालय से टूटा संपर्क, ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

इस रपटे के बहने से क्षेत्र के कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। मार्ग बंद होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और दैनिक कामगारों को उठानी पड़ रही है। अब ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए कई किलोमीटर का लंबा और घुमावदार रास्ता तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की चेतावनी को प्रशासन ने किया दरकिनार

ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब रपटे का निर्माण चल रहा था, तभी सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर प्रशासन को लिखित शिकायत दी थी और चेतावनी भी दी थी। समय रहते कार्रवाई नहीं होने से आज लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

आक्रोशित ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि वैकल्पिक व्यवस्था कर इस मार्ग पर आवागमन को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

 

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