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राखी के रंगों से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, बिहान से महिलाओं को मिला हुनर और स्वरोजगार का अवसर

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एमसीबी :  रक्षाबंधन का पर्व जहां भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, वहीं मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में इस पर्व ने ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी खोल दिए हैं। बिहान योजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आकर्षक एवं हस्तनिर्मित राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अंकिता सोम के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ना, उनकी आय के नए स्रोत विकसित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण में महिलाएं पूरे उत्साह और लगन के साथ राखी निर्माण की बारीकियां सीख रही हैं।

डिजाइनिंग से पैकेजिंग तक, राखी कारोबार के गुर
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को विभिन्न प्रकार की डिजाइनर राखियां तैयार करने, रंगों के बेहतर संयोजन, सजावट, फिनिशिंग और आकर्षक पैकिंग की तकनीक सिखाई जा रही है। इसके साथ ही उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए विपणन की जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल पारंपरिक तरीके से राखी बनाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री के तौर-तरीके भी बताए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़ाकर डिजिटल बाजार से जोड़ना है।

सोशल मीडिया बनेगा बाजार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पहुंच
प्रशिक्षण ले रहीं महिलाओं का कहना है कि वे राखी निर्माण का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आकर्षक राखियां तैयार करेंगी और स्थानीय बाजार में उनकी बिक्री करेंगी। साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार करेंगी।
महिलाएं मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी अपने उत्पादों को बेचने का प्रयास करेंगी। उनका मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए उनके उत्पाद जिले से बाहर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इससे बाजार का विस्तार होगा और समूह की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे।

राखी से शुरुआत, आगे त्योहारों के लिए उत्पाद बनाने की तैयारी
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। उनके लिए यह प्रशिक्षण सिर्फ राखी बनाना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने हुनर को रोजगार में बदलने और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर है। महिलाओं का कहना है कि पहले उनका अधिकांश समय घरेलू कार्यों में ही गुजरता था, लेकिन अब वे अपने कौशल को आय का साधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य राखी के साथ-साथ भविष्य में दीपावली, तीज, करवा चौथ सहित अन्य पर्व-त्योहारों के लिए हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर समूह की आय को लगातार बढ़ाना है।

प्रशिक्षण के साथ बाजार की समझ से बढ़ा आत्मविश्वास
महिलाओं ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमियों के लिए बड़े बाजार का माध्यम बन चुके हैं। यदि ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ उचित बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो वे भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। इसी सोच के साथ बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार, उत्पाद निर्माण और बाजार से जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण से महिलाओं में नया हुनर सीखने के साथ अपने उत्पादों को बाजार में उतारने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर लगातार जोर
कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम के नेतृत्व में एमसीबी जिले में बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षणों के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकें।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से मिले अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से उन्हें अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का भी धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनके कौशल को निखारने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
महिलाओं ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ परिवार की आय बढ़ाने और जिले के विकास में भागीदारी निभाने का अवसर देंगे। राखी निर्माण से शुरू हुआ यह सफर आने वाले समय में ग्रामीण महिला उद्यमिता की नई पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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