वरिष्ठ योग प्रशिक्षक ने कहा— मिलावटी पनीर ‘धीमा जहर’, दोषियों के लाइसेंस रद्द कर चलाया जाए सख्त अभियान
मनेन्द्रगढ़ : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में एनालॉग (सिंथेटिक) पनीर के उपयोग और बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के निर्णय का पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक एवं भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सतीश उपाध्याय ने स्वागत करते हुए इसे जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम बताया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे लाखों लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
सतीश उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से बड़े पैमाने पर सिंथेटिक एनालॉग पनीर का उपयोग हो रहा था, जिसके कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि यह नकली पनीर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर, स्टेबलाइजर और अन्य कृत्रिम रसायनों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसे “धीमा जहर” कहना गलत नहीं होगा। इसके लगातार सेवन से किडनी, लीवर और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में वर्षों से मिलावटी पनीर खुलेआम बिक रहा था। पिछले दो वर्षों में हजारों क्विंटल नकली पनीर की जब्ती यह साबित करती है कि यह समस्या कितनी गंभीर थी। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से मिलावटखोरों के हौसले लगातार बढ़ते गए।
योग शिविरों के अपने अनुभव साझा करते हुए उपाध्याय ने कहा कि उनके पास आने वाला लगभग हर पाँचवाँ व्यक्ति किडनी की गंभीर समस्या से जूझता दिखाई देता है। उनका मानना है कि खराब खान-पान और मिलावटी खाद्य पदार्थों का बढ़ता प्रचलन इसके प्रमुख कारणों में शामिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एनालॉग पनीर देखने और स्वाद में असली पनीर जैसा होता है, लेकिन इसमें दूध का उपयोग नहीं किया जाता। यह वनस्पति तेल, स्टार्च और रासायनिक पदार्थों से तैयार किया जाता है तथा इसमें प्रोटीन और कैल्शियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। सस्ता होने के कारण इसका उपयोग होटलों, रेस्टोरेंटों और कुछ डेयरी प्रतिष्ठानों में तेजी से बढ़ा है।
सतीश उपाध्याय ने सरकार से मांग की कि प्रतिबंध के बाद भी यदि कोई होटल, डेयरी या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान चोरी-छिपे एनालॉग पनीर का निर्माण अथवा बिक्री करता पाया जाए तो उसका लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए, भारी जुर्माना लगाया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा नियमित जांच अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की भी आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय तभी पूरी तरह सफल होगा, जब पूरे प्रदेश में नकली पनीर बनाने और बेचने वाले नेटवर्क पर लगातार सख्ती बरती जाएगी तथा मिलावटखोरी के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया जाएगा। इससे आम जनता को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।



