रायगढ़/बिलासपुर : साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL द्वारा रायगढ़ जिले में 3 नई खदानों को विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन विस्थापित होने वाले गांवों के पुनर्वास को लेकर अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है।
सोमवार को बिलासपुर में संभागायुक्त ने SECL के सीएमडी और रायगढ़ व कोरबा कलेक्टरों के साथ बैठक ली। बैठक में SECL को निर्देश दिए गए कि वे पहले विस्थापित होने वाले गांवों को दोबारा बसाने की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करें। इसके बाद ही डिस्ट्रिक्ट रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट कमेटी की बैठक होगी।
पेलमा माइंस में 8 गांव होंगे पूरी तरह विस्थापित
SECL ने सबसे पहले पेलमा माइंस को विकसित करने का काम शुरू किया है। 15 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता वाली यह खदान 2077 हेक्टेयर क्षेत्र में फैलेगी। इसमें 9 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है – पेलमा, उरबा, मडुवाडुमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडिह, खर्रा, सक्ता, मिलूपारा।
इनमें से 8 गांव पूरी तरह विस्थापित होंगे। संभागायुक्त ने SECL से सवाल किया कि इन विस्थापितों को कहां बसाया जाएगा और उनके लिए पुनर्वास व पुनर्व्यवस्थापन की क्या योजना है।
भू-अर्जन शुरू, ड्रोन सर्वे भी हुआ
SECL ने पेलमा, दुर्गापुर और पोरडा-चिमटापानी खदानों के लिए भू-अर्जन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अवैध निर्माण रोकने के लिए ड्रोन सर्वे भी कराया गया है। SECL पुनर्वास लाभ के रूप में प्रति 2 एकड़ पर 1 स्थाई नौकरी देती है, लेकिन पूरे गांव को दूसरी जगह बसाने के लिए मकान, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाओं की अलग व्यवस्था करना अनिवार्य है।
अधिकारियों ने कहा कि पुनर्वास योजना के बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।



