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रावतपुरा सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! CBI की फोन टैपिंग अवैध, सभी रिकॉर्डिंग नष्ट करने का आदेश

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बिलासपुर : हाईकोर्ट ने रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन एवं कथावाचक रावतपुरा सरकार (रवि शंकर महाराज) से जुड़े फोन टैपिंग मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीबीआई की फोन टैपिंग को अवैध करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फोन टैपिंग से प्राप्त सभी रिकॉर्डिंग्स को नष्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अब इस मामले की सुनवाई फोन टैपिंग से जुटाए गए साक्ष्यों के बिना होगी। सीबीआई को केवल अन्य वैध दस्तावेजों, गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखना होगा।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीबीआई और गृह मंत्रालय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जब फोन टैपिंग का मूल आदेश 28 जून 2025 को जारी हुआ था तो 1 जून 2025 से बैकडेट में उसकी मंजूरी कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने पाया कि आदेश में कहीं भी सार्वजनिक आपातस्थिति या जनसुरक्षा जैसी कानूनी आवश्यकताओं का उल्लेख नहीं था, जबकि फोन टैपिंग जैसे कदम के लिए यह अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि फोन टैपिंग किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार पर सीधा हस्तक्षेप है इसलिए इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने 28 जून 2025 का सीबीआई का टैपिंग आदेश, 4 जुलाई 2025 को गृह मंत्रालय की पुष्टि तथा 15 सितंबर 2025 की रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को भी निरस्त कर दिया।

ये है पूरा मामला

बता दें कि सीबीआई ने 30 जून 2025 को देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रिश्वत, फर्जी मरीज और ‘घोस्ट फैकल्टी’ के जरिए मेडिकल कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट प्रभावित की गई। श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रायपुर के चेयरमैन होने के कारण रावतपुरा सरकार को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने फोन टैपिंग के आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट का यह अहम फैसला आया है।

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