एस एच अज़हर दंतेवाडा किरंदुल : डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, किरंदुल में छात्र-कल्याण पहल के अंतर्गत तारुण्य वार्ता में पहले बालिकाओं के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था और आज किशोर वर्ग के बालकों के लिए ‘किशोरावस्था: चुनौतियाँ और मार्गदर्शन’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य एस. के. श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षको एवं बालकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य एस. के. श्रीवास्तव ने किशोरावस्था के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “किशोरावस्था जीवन का वह नाजुक पड़ाव है जहाँ शारीरिक और मानसिक बदलाव तेज़ी से होते हैं। इस उम्र में सही दिशा, अनुशासन और नैतिक मूल्य ही उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं।” बालकों को प्रेरित करते हुए उन्होंने विशेष रूप से कहा कि *”यह उम्र केवल एक मौका नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।”*और साथ ही उन्होंने यह कहा कि आपका जो व्यवहार है उसमें आपको माता-पिता एवं शिक्षकों ने क्या संस्कार दिए हैं वह परीलीक्षित होता है ।
वरिष्ठ शिक्षकों ने दिए व्यावहारिक मार्गदर्शन
कार्यशाला के दौरान वरिष्ठ शिक्षकों ने किशोरों की समस्याओं, उत्सुकताओं और उनके समाधान पर अपने विचार व्यक्त किए:
स्वास्थ्य एवं ऊर्जा प्रबंधन: सुखदेव सिंह ने किशोरावस्था में शारीरिक स्वास्थ्य, खेलकूद और ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।
भावनात्मक संतुलन: के. पी. सिन्हा ने इस आयु में भावनात्मक स्थिरता, नैतिक कर्तव्यों तथा बुरी संगति से दूर रहने के उपाय साझा किए।
तकनीक का संतुलित उपयोग: तपन कुमार राय ने मानसिक एकाग्रता, वैज्ञानिक सोच और सोशल मीडिया के संतुलित इस्तेमाल पर बल दिया।
तनाव प्रबंधन: मृणाल कांति देघरिया ने मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कला, साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने की प्रेरणा दी।
करियर एवं लक्ष्य: मनोज सिंह ने करियर निर्माण, समय प्रबंधन और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के व्यावहारिक तरीके बताए।
छात्रों को मिला खुलकर संवाद करने का अवसर
सत्र के दौरान छात्रों को अपनी आशंकाओं और प्रश्नों को शिक्षकों के समक्ष खुलकर रखने का अवसर मिला। शिक्षकों ने उनकी शंकाओं का समाधान कर उनका उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन अजय कुमार झा द्वारा किया गया।



