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पूजा के दौरान बार-बार बुझ रहा है दीपक? देवी-देवताओं की नाराजगी या कोई और वजह, जानें क्या कहते हैं धार्मिक संकेत

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पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। किसी भी देवी-देवताओं के आह्वान से पहले दीप प्रज्वलित किया जाता है। दीपक शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक है। दीपक की लौ मन को शांत करने और पूजा के दौरान एकाग्रता बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन कई बार अचानक दीपक बुझ जाता है। ऐसे में मन में सवाल उठता है कि इसे शुभ माना जाए या अपशकुन? धार्मिक मान्यताओं में दीपक के बुझने से जुड़े कई संकेत बताए गए हैं। यहां जानिए इनके बारे में…

एकाग्रता की कमी

दीपक का बुझना पूजा के दौरान एकाग्रता की कमी का संकेत भी माना जाता है। पूजा करते समय हमेशा मन को शांत और ध्यान को एकाग्र रखना चाहिए। अगर दीपक बार-बार बुझ रहा है तो पूजा के दौरान अपना ध्यान भटकने से बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

देवी-देवताओं की नाराजगी

कुछ धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में दीपक के बुझने को आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष से भी जोड़कर देखा जाता है। वहीं, कुछ लोग इसे देवी-देवताओं की नाराजगी का संकेत मानते हैं। हालांकि, सामान्य स्थिति में हवा चलने, तेल या घी कम होने जैसी वजहों से भी दीपक बुझ सकता है।

अशांत पितृ

पूजा के दौरान दीपक बुझने को पितरों की नाराजगी से भी जोड़ा जाता है। ऐसी स्थिति में इष्ट देव और भगवान से क्षमा प्रार्थना करने की बात कही जाती है। मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और मन से दोबारा पूजा करने से नकारात्मकता दूर करने में मदद मिल सकती है।

अनहोनी या काम अटक जाने का संकेत

पूजा के दौरान दीपक का अचानक बुझ जाना शुभ संकेत नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे आने वाले समय में किसी काम में बाधा की आशंका से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, हर बार यह अनहोनी का संकेत हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

दोबारा कैसे जलाएं दीपक?

अगर पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए तो उसे दोबारा जलाया जा सकता है। दीपक फिर से जलाने से पहले तेल या घी की मात्रा जांच लें। अगर बाती छोटी या मोटी हो गई है तो नई और सही आकार की बाती लगाएं। इसके बाद ईश्वर से क्षमा मांगकर दीपक दोबारा जला सकते हैं।

दीप प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का जाप करें जाप-

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदाम्।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

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