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ठेका पद्धति और नई स्थानांतरण नीति के विरोध में वन कर्मचारी संघ मुखर

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प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी, कहा स्थानीय ग्रामीणों और कर्मचारियों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

मनेन्द्रगढ़ :  छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वन विभाग के कार्यों में ठेका पद्धति लागू करने के प्रयास और फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना और स्थानांतरण के लिये प्रस्तावित नई विभागीय नीति का कड़ा विरोध किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने आरोप लगाया कि इन निर्णयों से प्रदेश के स्थानीय ग्रामीणों, वनवासियों और वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के रोजगार और सेवा हित प्रभावित होंगे।प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि छत्तीसगढ़ वन प्रधान राज्य है और यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आजीविका वन आधारित कार्यों पर निर्भर है। वृक्षारोपण, नर्सरी प्रबंधन, कूप कटाई, वन सुरक्षा और जल संरक्षण जैसे कार्यों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में स्थानीय ग्रामीणों को सीधे काम मिलने से उनकी आजीविका चलती है।

दुबे ने कहा कि यदि वन विभाग में ठेका पद्धति लागू की जाती है तो बाहरी ठेकेदार अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए मशीनों अथवा बाहरी श्रमिकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय ग्रामीणों और वनवासियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ने के साथ पलायन की स्थिति भी निर्मित हो सकती है।वन कर्मचारी संघ का कहना है कि स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों की संयुक्त भूमिका से ही जंगलों की सुरक्षा प्रभावी रूप से संभव होती है। संघ ने आशंका जताई कि ठेका आधारित व्यवस्था से वन संरक्षण के कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और अवैध कटाई और वन्यजीव सुरक्षा जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

फ्रंट लाइन स्टाफ की स्थानांतरण नीति पर भी आपत्ति

संघ ने वन विभाग के वर्दीधारी फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना और स्थानांतरण के लिये तैयार की जा रही नई विभागीय स्थानांतरण नीति पर भी सवाल उठाये हैं। अजीत दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग के पत्र क्रमांक 3371/910/2019/10-1/1 दिनांक 18 अक्टूबर 2019 के माध्यम से स्वयं प्रधान मुख्य वनसंरक्षक द्वारा फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना और स्थानांतरण से जुड़ी विसंगतिपूर्ण विभागीय नीति का विरोध किया जा चुका है।।उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कर्मचारियों के हितों को प्रभावित करने वाली नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जा रहा है जिससे वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संघ ने शासन से मांग की है कि फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना और स्थानांतरण से जुड़ी किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले कर्मचारियों के हितों और विभागीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाये।

कार्य बहिष्कार की चेतावनी

छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडे के समक्ष ठेका पद्धति को वापस लेने तथा प्रस्तावित स्थानांतरण नीति पर रोक लगाने की मांग रखी है। प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने चेतावनी दी कि यदि ठेका पद्धति वापस नहीं ली गई, फ्रंट लाइन स्टाफ के लिए प्रस्तावित स्थानांतरण नीति पर रोक नहीं लगाई गई और वनवासियों और कर्मचारियों के रोजगार तथा सेवा हित सुरक्षित नहीं किये गये तो संघ प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार करने के लिये बाध्य होगा। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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