संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : खरीफ सीजन प्रारंभ होते ही किसानो की चिन्ता बढ जाती है जहा किसान बारिश फसल को लेकर चिंतित रहते है वही उनकी सबसे बडी चिन्ता खाद की होती है सीजन प्रारंभ होते ही व्यापारी मोटी रकम मे खाद बेचना प्रारंभ कर देते है जहा किसान मजबूरी वश अपनी फसल बचाने महंगे दामो पर खाद खरीदने बेबश है वही शासन प्रशासन द्वारा भी दावे किये जाते है कि ज्यादा दामो पर खाद बिक्री मे कार्यवाही हो रही मगर धरातल पर मामला अलग ही है किसान जब खेतो मे फसले लगाते है तब किसानो को अपनी फसल बचाना और फसलो की देखरेख मे भारी परेशानियो का सामना करना पडता है जहा किसान कभी मौसम की बेरूखी तो कभी मौसम की मेहरबानी से चिंतित रहते है कम बारिश होती है तो फसले नुकसान ज्यादा बारिश तो भी फसल नुकसान जैसे तैसे फसल संभलता है तो खाद की मार जहा व्यापारी खाद की कमी व स्टाक के चलते शार्टेज बताकर उंचे दामो मे खाद बेचते है और किसान अपनी फसल बचाने मजबूरी मे महंगे दामो मे खाद खरीदने विवश हो जाते है.
ठीक ऐसा ही किसानो की शिकायत पर जब खाद की पडताल करने नगरी ब्लाक के बेलरगाव क्षेत्र पहुची जहा बस्तर बार्डर जैतपुरी के पास एक पीअप खाद भर कर बस्तर की ओर जा रही थी जिसे रोककर किसानो से जब जानकारी लिये तो किसान ने बताया की वे घुरावर एक दूकान से 75 बोरी यूरिया खरीद कर बस्तर जा रहे जहा एक बोरी खाद का दूकानदार ने 500 रूपय लिया और पक्के मशीन के बील के बजाय दूकान के नाम से छपी बिल का रसीद काटकर दिया और बाल मे खाद का रेट 266 अंकित किया गया वही किसान ने बताया की हमे खाद से मतलब है 500बोरी बोले तो खरीद कर ला रहे है फसल बचाना जरूरी है वही उसके बाद एक मेटाडोर लगभग 200 बोरी यूरिया लोड कर उडीसा जा रहा था जिसे रोककर जब जानकारी लिये तो बताया की बेलर की एक दूकान से खाद लोडकर उडीसा जा रहा हू मेरे पास खाद का कोई जरूरी डाक्यूमेंट्स नही है.
बता दे नगरी क्षेत्र का बेलर जैतपुरी मार्ग बस्तर उडीसा जाने का इन दिनो प्रमुख मार्ग बन गया है जहा रोजाना बस्तर व उडीसा की कई गाडिया इस मार्ग मे खाद के लिये आते है जो यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित है यहा न ही तो कोई जांच नाका है और नही तो यहा कोई अधिकारी जाच मे आते है यही कारण है की इस क्षेत्र मे धडल्ले से व्यापारी खाद मनचाहा रेट मे उडीसा बस्तर बेच रहे बता दे यहा फर्टिलाइजर्स अधिकारी की नियुक्ति हुई है वो यहा पर निवास नही करते वो जिला मुख्यालय मे रहते है ऐसे मे अधिकारियो के कार्य शैली को लेकर भी सवाल खडे हो रहे है की रोजाना यहा आखिर किसके इशारे पर उडीसा और बस्तर खाद की सप्लाई हो रही है।





