राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद : सावन माह के अंतिम सोमवार से पहले रविवार को गरियाबंद के प्रसिद्ध स्वयंभू शिवलिंग भूतेश्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र शिवभक्तों से पट गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और चारों ओर सिर्फ हर-हर महादेव एवं बोल बम के जयकारे गूंजते रहे।भूतेश्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए जिले के साथ-साथ कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हुए थे। बड़ी संख्या में कांवरिए कांधे पर कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बनाए गए पार्किंग स्थल भी वाहनों से पूरी तरह भर गए। गरियाबंद से भूतेश्वरनाथ जाने वाले रास्ते पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
जगह-जगह पुलिस की तैनाती, यातायात व्यवस्था पर विशेष नजर
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से जगह-जगह जवानों की ड्यूटी लगाई गई। मंदिर मार्ग, पार्किंग स्थल, प्रमुख चौक-चौराहों और भीड़ वाले स्थानों पर पुलिसकर्मी यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के साथ ही वाहनों की पार्किंग और मार्ग व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं और गाड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यालय स्थित गांधी मैदान को भी इस बार पार्किंग बनाया गया था।
कांवरियों के लिए जलपान और भंडारे, गरियाबंद में दिखी सेवा की मिसाल
भूतेश्वरनाथ धाम पहुंचने वाले कांवरियों और शिवभक्तों की सेवा के लिए जगह-जगह जलपान, शरबत और भंडारे की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने आगे बढ़कर सेवा कार्य किया। कहीं शुद्ध पेयजल और जलपान की व्यवस्था नजर आई तो कहीं भक्तों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। बताना लाजिमी होगा कि भूतेश्वरनाथ मंदिर परिसर पर श्री भोलेनाथ युवा भंडारा समिति सहित कई समितियों के युवाओं में आस्था के साथ-साथ सेवा भाव का यह नजारा भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। दूर-दराज से आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ सेवा की।
भगवान श्रीराम से लेकर रावण तक अलग-अलग वेशभूषा में नजर आए कांवरिए
इस बार कांवरिया यात्रा में भक्ति के साथ रचनात्मकता और धार्मिक उत्साह का भी अद्भुत संगम देखने को मिला। कई कांवरिए भगवान श्रीराम, भगवान शिव और माता पार्वती सहित विभिन्न वेशभूषा में नजर आए। वहीं कुछ कांवरिए रावण की वेशभूषा में भी दिखाई दिए, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने। डीजे की धुन और भक्ति गीतों पर कांवरिए जमकर झूमते नजर आए। नाचते-गाते और बोल बम के जयकारे लगाते हुए कांवरियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जगह-जगह लोगों की भीड़ इन धार्मिक झांकियों और कांवरियों के उत्साह को देखने के लिए जुटी रही।
बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा पूरा अंचल
भूतेश्वरनाथ धाम की ओर बढ़ते कांवरियों के जत्थों और श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा अंचल भक्तिमय हो उठा। हर तरफ “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और भगवान भोलेनाथ के जयकारे सुनाई देते रहे। सावन के अंतिम सोमवार से पहले रविवार को भूतेश्वरनाथ धाम में उमड़ी इस ऐतिहासिक भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गरियाबंद की धरती पर भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी और अटूट है। भक्ति, उत्साह, सेवा और सुरक्षा व्यवस्था के बीच भूतेश्वरनाथ महादेव धाम में सावन का यह रविवार श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया। आस्था के इस सैलाब ने गरियाबंद को पूरी तरह शिवमय कर दिया।
सावन के अंतिम सोमवार पर भूतेश्वरनाथ के दर्शन को उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाबसावन माह के अंतिम सोमवार को गरियाबंद के मरौदा स्थित प्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अंतिम सोमवार के अवसर पर भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। मरौदा में स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव को स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है और इसका आकार हर वर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि भूतेश्वरनाथ धाम की महिमा और आस्था दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से भगवान भूतेश्वरनाथ से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते सावन माह में हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय होने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारियां की गई है।





