भोजन-नाश्ते की गुणवत्ता पर पहले ही उठ चुके हैं सवाल, अब शव को जनरल वार्ड में रखने के बाद नई अव्यवस्था उजागर; मरीजों को घर से लाना पड़ रहा बिस्तर
अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो चीफ रायगढ़ /धरमजयगढ़ : शासन की मंशा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की है, इसके लिए हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन धरमजयगढ़ का सिविल अस्पताल इन दावों की जमीनी हकीकत को खुद-ब-खुद उजागर कर रहा है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को अब दवा के साथ-साथ अपना बिस्तर भी घर से लाना पड़ रहा है।
घर से चादर-तकिया लाने को मजबूर मरीज
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने बताया कि वार्ड में बेड तो है, लेकिन उस पर बिछाने के लिए चादर और सिर के नीचे लगाने के लिए तकिया नहीं है। मांगने पर वार्ड स्टाफ द्वारा हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। आलम यह है कि मरीजों के परिजन अपने घरों से चादर, तकिया और कंबल लाकर काम चला रहे हैं। सवाल उठता है कि जब बुनियादी लिनन की व्यवस्था ही अस्पताल नहीं कर पा रहा तो करोड़ों का बजट आखिर जा कहां रहा है?
सवालों के घेरे में भोजन और मानवीय संवेदनाएं
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मरीजों को दिए जाने वाले भोजन और नाश्ते की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। वहीं कुछ दिन पूर्व एक शव को घंटों तक जनरल वार्ड में ही रखे रहने की घटना ने अस्पताल की संवेदनहीनता को उजागर किया था, जिस पर जमकर हंगामा हुआ था।
बदबू के बीच कैसे होगा इलाज?
अस्पताल परिसर और वार्डों में फैली दुर्गंध ने मरीजों की तकलीफ और बढ़ा दी है। गंदगी और बदबू के बीच भर्ती मरीजों का स्वास्थ्य कैसे सुधरेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। स्वच्छ वातावरण ही उपचार की पहली शर्त है, लेकिन यहां वही सबसे ज्यादा उपेक्षित है।
जांच की मांग तेज
लगातार सामने आ रही इन शिकायतों के बाद अब स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर रायगढ़ और सीएमएचओ रायगढ़ से अस्पताल का औचक निरीक्षण कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक बजट खर्च और टेंडर प्रक्रिया की जांच नहीं होगी, तब तक व्यवस्थाएं नहीं सुधरेंगी।
सबसे बड़ा सवाल –जब सरकार पैसा दे रही है, स्टाफ है, संसाधन हैं, फिर भी मरीज को चादर के लिए घर की ओर देखना पड़ रहा है, तो कमी सिस्टम में है या नियत में?









