जांजगीर-चांपा : स्कूलों में लागू ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाली शासकीय हाईस्कूल तुलसी की व्याख्याता (एलबी) निर्मला कोमल लहरे के खिलाफ लोक शिक्षण संचालनालय ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 3 सितंबर 2026 को जारी निलंबन आदेश में वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री और कलेक्टर के संबंध में की गई कथित अशोभनीय टिप्पणियों को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
दरअसल, ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षिका निर्मला कोमल लहरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में उन्होंने शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज किए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि शिक्षकों की उपस्थिति ऐप के माध्यम से दर्ज की जा रही है, तो अधिकारियों और कलेक्टर की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज की जानी चाहिए।
ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर जताई थी नाराजगी
वायरल वीडियो में शिक्षिका ने ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए शिक्षकों को समय पर स्कूल पहुंचने में होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि कई शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचने की कोशिश में रास्ते में होने वाली परेशानियों और दुर्घटनाओं का सामना करते हैं।
उन्होंने सरकार से शिक्षकों पर ऐप के जरिए निगरानी रखने के बजाय अन्य व्यवस्थाओं और जमीनी समस्याओं पर भी ध्यान देने की बात कही थी। इस दौरान उन्होंने सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों का मुद्दा उठाते हुए उन्हें हटाने की मांग भी की थी।
वीडियो में शिक्षिका ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को भी सार्वजनिक करने की बात कही थी, ताकि जनता उन पर नजर रख सके। उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगी और व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर सरकार को आगामी चुनाव में सत्ता से बाहर होने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी।
CM-कलेक्टर पर टिप्पणी को विभाग ने माना आपत्तिजनक
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा की ओर से 2 सितंबर को भेजे गए पत्र के आधार पर कार्रवाई की गई। आदेश में उल्लेख है कि 31 अगस्त 2026 को वायरल हुए वीडियो में निर्मला कोमल लहरे ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर के संबंध में कथित अशोभनीय टिप्पणियां करते हुए आलोचना की और वीडियो को मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया।
विभाग ने शिक्षिका के इस कृत्य को उनके पदीय दायित्वों के विपरीत बताते हुए शासन और विभाग की छवि को धूमिल करने वाला माना है। आदेश में इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 और 10 के तहत कदाचार बताया गया है।
कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं आया काम
विभाग के अनुसार, मामले में जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से शिक्षिका को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। इसके जवाब में निर्मला कोमल लहरे ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन विभाग ने उनके जवाब को संतोषजनक और समाधानकारक नहीं माना।
इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (1)(क) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
निलंबन अवधि में DEO कार्यालय रहेगा मुख्यालय
निलंबन अवधि के दौरान शिक्षिका को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जांजगीर-चांपा निर्धारित किया गया है।




