Home छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री आवास योजना पर ‘भाड़ में जाए’!

प्रधानमंत्री आवास योजना पर ‘भाड़ में जाए’!

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बैकुंठपुर/कोरिया: प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना को लेकर सचिवों के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप में एक जिम्मेदार जनपद अधिकारी की कथित अभद्र टिप्पणी सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल स्क्रीनशॉट में योजना से संबंधित चर्चा के दौरान अधिकारी के मोबाइल नंबर से “ज्यादा क्या दिमाग लगाना, पेलो ना भाईया। बाकी मैं तो हूं। भाड़ में जाए” जैसे आपत्तिजनक शब्द लिखे जाने का दावा किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी की भाषा और शासकीय मर्यादा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

योजना से जुड़े ग्रुप में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल

सामने आए व्हाट्सऐप स्क्रीनशॉट में ‘सचिव ग्रुप विकासखंड सोनहत’ नामक ग्रुप दिखाई दे रहा है। इसमें Manoj Singh Jagat नाम से सेव नंबर से प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर टिप्पणी की गई है। कथित संदेश में योजना को लेकर सवाल उठाते हुए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है।

हालांकि, स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यदि यह संदेश वास्तव में संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के आधिकारिक व्हाट्सऐप नंबर से भेजा गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय बन जाता है।

गरीबों से जुड़ी योजना, फिर ऐसी भाषा क्यों?

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण क्षेत्र के गरीब, जरूरतमंद और आवासविहीन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसके क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत सचिव से लेकर जनपद स्तर के अधिकारियों तक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में योजना से जुड़े आधिकारिक ग्रुप में ही कथित तौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होना कर्मचारियों के साथ-साथ योजना के प्रति अधिकारी की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।

शासकीय ग्रुप में अधिकारी की भाषा पर उठे सवाल

शासकीय कार्यों के लिए बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप अब प्रशासनिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे मंच पर अधिकारियों से संयमित, मर्यादित और गरिमापूर्ण भाषा की अपेक्षा की जाती है। यदि वायरल स्क्रीनशॉट सही पाया जाता है तो यह देखना भी जरूरी होगा कि क्या संबंधित अधिकारी ने अपने पद की गरिमा और शासकीय आचरण के अनुरूप व्यवहार किया है।

निष्पक्ष जांच के बाद हो कार्रवाई

मामले को लेकर जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। मांग है कि वायरल स्क्रीनशॉट की तकनीकी एवं विभागीय स्तर पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त संदेश किस नंबर से और किस व्यक्ति द्वारा भेजा गया। यदि जांच में कथित टिप्पणी संबंधित अधिकारी द्वारा किया जाना प्रमाणित होता है, तो शासकीय आचरण एवं पद की गरिमा के अनुरूप उचित कार्रवाई की जाए।

अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि वह इस मामले को महज व्हाट्सऐप की टिप्पणी मानकर छोड़ता है या फिर शासकीय मर्यादा से जुड़े इस मामले की गंभीरता से जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है।

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