राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- नगर में बारिश आते ही जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसके स्थायी समाधान को लेकर नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। बारिश ने नगर के गंदे पानी की निकासी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने रख दी, जिसने विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी। अधूरे सड़क-नाली निर्माण और जाम नालियों के कारण कई जगह पानी सड़कों पर जमा रहा। सवाल यह है कि जब हर साल बारिश में यही समस्या सामने आती है, तो पालिका प्रशासन ने इससे निपटने के लिए अब तक क्या ठोस तैयारी की?गरियाबंद पालिका प्रशासन की बात करें तो नगर विकास के लिए कोई मास्टर प्लान तक नहीं है, जिसका खामियाजा आज भी नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि गरियाबंद जिला मुख्यालय हो गया है, भले ही सड़के ऊपर और चौड़ी हो गई है, लेकिन जिस जगह गंदे पानी जमा हो रहे हैं, वह आज दशकों पूर्व के समय के नीम रपटा की तस्वीर को सामने लाकर खड़े कर दे रही है, जिसमें कभी पानी की तेज धार बहती थी और उसे पार कर लोग आवाजाही करते थे। लोगों का कहना है कि समय के साथ गरियाबंद में बहुत कुछ बदला लेकिन समस्याएं नहीं बदली।
गरियाबंद जिला मुख्यालय बनने के बाद शहर में सड़कें चौड़ी हुईं, कई जगह नए निर्माण हुए और विकास के दावे भी किए गए, लेकिन गंदे पानी की निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्था आज भी पुराने ढर्रे पर नजर आ रही है। नगर के कई हिस्सों में बारिश का पानी निकलने का रास्ता नहीं होने के कारण सड़क में पानी भर जा रही है। नेशनल हाईवे पर पुराने नीम रपटा क्षेत्र में आज भी जलभराव की स्थिति ने लोगों को वर्षों पुरानी तस्वीर की याद दिला दी, जब यहां बारिश के दिनों में पानी की तेज धार बहा करती थी। फर्क सिर्फ इतना है कि समय के साथ शहर बदला, सड़कें बदलीं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज भी नजर नहीं आता।
–अधूरी नालियां और निर्माण ने बढ़ाई परेशानी–
नगर में जलभराव की एक बड़ी वजह सड़क और नाली निर्माण की अव्यवस्था भी सामने आ रही है। नेशनल हाईवे पर सड़क चौड़ीकरण के साथ नाली निर्माण का काम शुरू तो हुआ, लेकिन बारिश आने तक कई जगह काम अधूरा रह गया। नतीजा यह हुआ कि बारिश का पानी सुचारू रूप से निकलने के बजाय सड़कों पर जमा होने लगा। जब बारिश का मौसम सामने था, तो निर्माण कार्य को समय रहते पूरा करने और वैकल्पिक जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी, यह सवाल अब पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। वहीं सड़क किनारे बनी दुकानों के कारण कई जगह नालियां ढंक गई हैं। नालियों तक सफाईकर्मियों की पहुंच नहीं होने और कचरा जमा होने से जलनिकासी प्रभावित हो रही है। इसका असर जिला अस्पताल जाने वाली सड़क पर भी देखने को मिला, जहां चमचमाती डामर सड़क पर मटमैला पानी जमा रहा। एक तरफ शहर में विकास कार्यों की तस्वीर दिखाई जाती है, तो दूसरी तरफ उसी शहर की प्रमुख सड़कें बारिश में जलभराव और गंदे पानी की समस्या से जूझती नजर आती हैं।
–विकास की चमक के बीच जलभराव का दाग–
नगरवासियों का कहना है कि शहर में समय के साथ कई बदलाव हुए, लेकिन जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। सवाल यह भी है कि क्या नगर के विकास के लिए कोई समग्र और दीर्घकालीन जलनिकासी योजना तैयार की गई है? यदि योजना है तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें सिर्फ जलभराव की नहीं, बल्कि पालिका की बारिश पूर्व तैयारी, निर्माण कार्यों की निगरानी, नालियों की सफाई और शहर की समग्र प्लानिंग पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। अधूरे सड़क-नाली निर्माण, जगह-जगह बाधित नालियां और पानी निकासी के कमजोर इंतजाम का खामियाजा आम राहगीरों और वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।
नगरवासियों की मांग है कि पालिका प्रशासन जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर तत्काल स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था करे। साथ ही अधूरे नाली और सड़क निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा करने, नालियों से अतिक्रमण और कचरा हटाने और बारिश पूर्व तैयारियों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए। क्योंकि हर बारिश के बाद समस्या सामने आने और फिर उसके गुजर जाने का इंतजार करने के बजाय पालिका को अब इसका स्थायी समाधान तलाशना होगा।
–तीन दिन की मूसलाधार बारिश में घुटने से ऊपर तक भरा था पानी–
जुलाई माह में 27, 28 और 29 तारीख को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान नीम रपटा क्षेत्र में घुटने से ऊपर तक पानी भर गया था। पानी का स्तर इतना बढ़ गया था कि इस रास्ते से लोगों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद करीब दो माह बाद भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाना नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और वर्तमान में सड़क चौड़ीकरण का काम कर रहे एनएच विभाग के बीच समन्वय नहीं होने के कारण जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। निर्माण के दौरान बारिश के पानी की निकासी के लिए ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से परेशानी बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जुलाई की बारिश में जलभराव की भयावह स्थिति सामने आ चुकी थी, तो उसके बाद भी पालिका और संबंधित विभाग ने इस संवेदनशील स्थान पर स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की?
–अधिकारी-नेताओं की आवाजाही, फिर भी समस्या पर नहीं दिया ध्यान–
नीम रपटा क्षेत्र नगर के प्रमुख मार्ग पर स्थित है। इस मार्ग से जिले के आला अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और नेताओं की लगातार आवाजाही होती है। बावजूद इसके सड़क पर जलभराव की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जब जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजरों के सामने यह समस्या मौजूद है, तो आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए प्रभावी पहल क्यों नहीं हुई? इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान कुछ घंटों या दिनों के लिए जलभराव होना अलग बात है, लेकिन एक ही स्थान पर बार-बार ऐसी स्थिति बनना यह बताता है कि समस्या का मूल कारण दूर करने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं हुए हैं।
–पालिका अध्यक्ष की सुस्ती पर उठ रहे सवाल, करोड़ों के काम के बाद भी नहीं बदली शहर की तस्वीर–
नगर पालिका में एक बार फिर भाजपा का अध्यक्ष चुना गया है। यह तीसरी बार है जब जनता ने भाजपा पर भरोसा जताते हुए अपना जनसमर्थन दिया है। ऐसे में नगरवासियों को पालिका से विकास कार्यों में तेजी और नगर की तस्वीर बदलने की बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन वर्तमान में पालिका अध्यक्ष रिखीराम यादव की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर लोगों के बीच चर्चाएं शुरू हो गई हैं।जानकारी के मुताबिक नगर में अब तक करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए गए हैं, बावजूद इसके शहर की बुनियादी समस्याओं और व्यवस्थाओं में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि जितने बड़े स्तर पर विकास के लिए राशि खर्च की जा रही है, उसके अनुरूप नगर की तस्वीर भी बदलनी चाहिए थी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विकास कार्यों की धीमी गति और प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव के कारण योजनाओं का अपेक्षित लाभ नगर को नहीं मिल पा रहा है? तीसरी बार मिले जनादेश के बाद अब लोगों की नजर पालिका अध्यक्ष के कामकाज और आने वाले दिनों में विकास को लेकर उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर टिकी है।





