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चाय-कॉफी के शौकीनों के लिए जरूरी खबर! ज्यादा गर्म पेय पीने से 3 गुना तक बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

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नई दिल्ली : भारत में चाय और कॉफी पीने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। कई लोगों को चाय या कॉफी इतनी गर्म पसंद होती है कि कप से निकलती भाप के बीच ही उसका सेवन शुरू कर देते हैं। लेकिन एक नई स्टडी ने बहुत गर्म पेय पदार्थों के सेवन और ग्रासनली (Esophagus) के कैंसर के जोखिम के बीच संबंध को लेकर चिंता बढ़ाई है।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित शोध के मुताबिक, बहुत गर्म पेय पदार्थों का नियमित सेवन करने वालों में ग्रासनली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) का जोखिम सामान्य तापमान के पेय लेने वालों की तुलना में अधिक पाया गया।

बहुत गर्म पेय लेने वालों में 3 गुना तक ज्यादा जोखिम

शोध में करीब 10 लाख लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें प्रतिभागियों से उनके गर्म पेय पदार्थों के सेवन की मात्रा और उन्हें पेय किस तापमान पर पसंद है, इस बारे में जानकारी ली गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अपने पेय को गर्म पसंद करते थे, उनमें गुनगुने पेय पसंद करने वालों की तुलना में ग्रासनली के SCC का जोखिम करीब दोगुना पाया गया। वहीं, बहुत गर्म पेय पसंद करने वालों में यह जोखिम तीन गुना से भी अधिक पाया गया।

दिन में 6 या उससे ज्यादा गर्म पेय भी चिंता का विषय

अध्ययन में पेय पदार्थों की मात्रा को भी ध्यान में रखा गया। प्रतिभागियों को रोजाना 6 से कम या 6 या उससे अधिक गर्म पेय लेने वाले समूहों में बांटा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, तापमान को ध्यान में रखने के बाद रोजाना छह या उससे अधिक गर्म पेय लेने वालों में छह से कम गर्म पेय लेने वालों की तुलना में ग्रासनली के SCC का जोखिम 71 प्रतिशत अधिक पाया गया।

क्या चाय-कॉफी छोड़ना जरूरी है?

शोध का मुख्य संकेत चाय या कॉफी छोड़ने के बजाय उसे बहुत ज्यादा गर्म पीने की आदत से बचने की ओर है। विशेषज्ञों के अनुसार, पेय पदार्थ को थोड़ा ठंडा होने देना और गुनगुना या कम गर्म होने पर उसका सेवन करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

ग्रासनली मुंह से पेट तक भोजन और पेय पदार्थ पहुंचाने वाली मांसपेशीय नली है। इसके कैंसर के सबसे आम प्रकारों में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा शामिल है।

ध्यान दें: स्टडी में गर्म पेय के तापमान और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि गर्म चाय या कॉफी पीने से निश्चित रूप से कैंसर होगा। कैंसर का जोखिम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

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