“यह सत्य की गूंज और न्याय की जीत है…” — विधायक अनुज शर्मा
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा द्वारा विधानसभा में की गई आक्रामक घेराबंदी और निरंतर प्रयासों के बाद 42 वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की भर्ती को रद्द कर दिया गया है।
राज्यकर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा द्वारा आदेश जारी होने के बाद विभाग ने इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर कर दी है, ताकि दागी कर्मचारियों को अदालत से कोई त्वरित राहत न मिल सके।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य कर जीएसटी विभाग में वर्ष 2021 और 2022 में सीमित विभागीय भर्ती परीक्षा के माध्यम से नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए 42 वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। वर्तमान राज्यकर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा द्वारा जारी कड़े आदेश के तहत इन सभी 42 कर्मचारियों को उनके मूल पद (लिपिक) पर पदावनत कर दिया गया है। संभावित न्यायालयीन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए विभाग ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर कर दिया है।
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा के प्रयासों से हिला तंत्र: बजट से मानसून सत्र तक ऐसे चली क्रोनोलॉजीइस महाघोटाले को रफा-दफा करने की पुरजोर विभागीय कोशिश की जा रही थी, लेकिन धरसींवा विधायक अनुज शर्मा की विधानसभा में लगातार आक्रामक घेराबंदी और कड़े रुख के कारण आखिरकार भ्रष्ट तंत्र को झुकना पड़ा। विधायक अनुज शर्मा द्वारा सदन में किए गए सिलसिलेवार प्रयास इस प्रकार हैं:
1. बजट सत्र (तारांकित प्रश्न क्रमांक 829): विधायक अनुज शर्मा ने सबसे पहले बजट सत्र में तारांकित प्रश्न के माध्यम से इस नियम विरुद्ध पदोन्नति के मामले को उठाकर विभाग की कमियां उजागर कीं।
2. 10 मार्च (ध्यानाकर्षण प्रस्ताव द्वारा घोषणा): इसके बाद उन्होंने 10.03.2025 को विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से इस करोड़ो रुपये के लेन-देन वाले घोटाले को प्रमुखता से सदन के पटल पर रखा। सदन में चौतरफा घिरने के बाद विभागीय मंत्री ने मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराकर कड़ी कार्रवाई करने की आधिकारिक घोषणा की।
3. मानसून सत्र (अतारांकित प्रश्न क्रमांक 767): विभागीय मंत्री की घोषणा के बावजूद जब अफसरों ने कार्रवाई में ढिलाई बरती, तो विधायक अनुज शर्मा ने मानसून सत्र में दोबारा अतारांकित प्रश्न दाग दिया। उन्होंने सीधे मंत्री जी की सदन में की गई घोषणा पर अब तक हुई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांग ली।
विधायक शर्मा के इस कड़े और अडिग रुख के बाद विभाग के उच्चस्थ अधिकारी पूरी तरह हरकत में आए और जाँच समिति को अविलंब रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम रहा कि सीजीपीएससी घोटाले की तरह ही जीएसटी विभाग का यह पदोन्नति घोटाला पूरी तरह बेनकाब हो सका।
चयन समिति का कबूलनामा: बिना सील के खुद कमिश्नर समीर विश्नोई लाए थे पेपर
जाँच समिति के सामने तत्कालीन चयन समिति के सदस्यों—कल्पना तिवारी (तत्कालीन अपर आयुक्त), टी.आर. धुर्वे (तत्कालीन संयुक्त आयुक्त) और रौशन सिंह (सहायक आयुक्त)—ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:
* गोपनीयता भंग: चयन समिति ने स्वीकार किया कि परीक्षा हॉल में प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं बिना सील (Unsealed) किए सीधे तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई द्वारा स्वयं पहुंचाई गई थीं।
* गायब रिकॉर्ड: हद तो यह है कि परीक्षा में पारदर्शिता का दावा करने वाला विभाग परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड (Attendance Record) तक जाँच समिति को देने में असमर्थ रहा।
डॉ. खूबचंद बघेल के निबंध ने खोली पोल, गलत उत्तरों पर भी बांटे नंबर
उत्तर पुस्तिकाओं की कड़ाई से हुई जाँच में भ्रष्टाचार के ऐसे अकाट्य सबूत मिले हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता:
एक जैसा निबंध: छत्तीसगढ़ राज्य के प्रणेता डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी पर पूछा गया निबंध सभी चयनित अभ्यर्थियों की कॉपियों में शब्द-ब-शब्द (हूबहू) एक समान लिखा हुआ पाया गया। इससे स्पष्ट है कि सबको पहले से मॉडल आंसर रटवाया या नकल कराया गया था।
गलत जवाब पर पूरे अंक: चहेते अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) का सहारा लेकर फर्जी तरीके से अंक बढ़ाए गए और गलत उत्तरों पर भी पूरे नंबर लुटाए गए।
जाँच में उजागर हुई अन्य गंभीर अनियमितताएं
RTI अफसरों को तत्काल हटाया: घोटाला छुपाने के लिए चयन सूची आते ही उत्तर पुस्तिका मांगने वाले अभ्यर्थियों को रोकने के लिए मूल जनसूचना अधिकारियों को हटाकर, चयन समिति के ही अफसरों को RTI का प्रभार सौंप दिया गया था।
बैकडेट में बदली योग्यता तिथि: कुछ अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक स्नातक भी नहीं थे, उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए पात्रता नियमों और अर्हता तिथि में बदलाव किया गया।
* 10 साल में भृत्य से सीधे इंस्पेक्टर: नियमों को दरकिनार कर महज 10 साल की सेवा अवधि के भीतर भृत्य से लोअर डिवीजन क्लर्क और फिर सीधे ‘निरीक्षक’ जैसे राजपत्रित समकक्ष पद पर पदोन्नति दे दी गई।
42 जीएसटी निरीक्षक, जिनकी भर्ती हुई रद्द
2021 भर्ती वाले
आकाश त्रिपाठी, दिव्य प्रकाश वर्मा, भरत लाल साहू, ओम नारायण बघेल, संतु राम सलाम, नीरज श्रीवास्तव, अमित हुमने, भूषण कुर्रे, तोमन लाल भुआर्या, यज्ञेश दीवान, पुष्पेंद्र करश, विधान रंजन कुल्लू, युगल किशोर साहू, मलिक राम बांधे, लाल साय राम, गो शिवेंद्र टांडे, सत्य नारायण नेताम, मोनिका दीवान, जितेंद्र नेताम, दुरूपरसाय मांझी, अनिल कुमार जांगड़े
2022 भर्ती वाले
सुरेश कुमार गुप्ता, प्रभात चन्द्र तिवारी, अजय कौशिक, हितेश कुमार दुबे, दीपा उधवानी, रितु सोनकर, दीपेश कुमार साहू, गायत्री सिन्हा, गजेंद्र कुमार तिवारी, ओम प्रकाश साहू, मनीष चेलक, ताम्रध्वज साहू, नंदनी साहू, दीपक तुरियाकर, अमर सिंह कंवर, उदयराम ध्रुव, रमेश कुमार धृतलहरे, दीप्ति मरकाम, चंद्रकांत ठाकुर, दीपक कुजूर, राकेश कुमार मिंज



