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GST फर्जीवाड़े का बड़ा मामला: ₹141.74 करोड़ की फर्जी खरीदी-बिक्री, ₹23.43 करोड़ की ITC का दावा

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रायपुर : राजधानी में जीएसटी फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। अगस्त्य इंटरप्राइजेस पर बोगस कंपनियों के जरिए ₹141.74 करोड़ की खरीदी-बिक्री दिखाकर ₹23.43 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने का आरोप है। जीएसटी विभाग की जांच में संबंधित फर्मों के दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के दौरान कई कंपनियां कथित तौर पर फर्जी या अस्तित्वहीन मिलीं।

जीएसटी अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लाभांडी स्थित सिग्नेचर होम निवासी अमन अग्रवाल, संचालक अगस्त्य इंटरप्राइजेस, के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच में दस्तावेजों की गड़बड़ी का खुलासा

पुलिस के मुताबिक जीएसटी विभाग की जांच में सामने आया कि अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने अलग-अलग फर्मों से खरीदी के बिल दिखाए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ITC का दावा किया।

जांच के दौरान कई दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आईं। इनमें एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें 16 साल पहले मृत व्यक्ति के नाम से किरायानामा तैयार कर कारोबार संचालित किए जाने का आरोप है।

मृत व्यक्ति के नाम 2025 में बनाया किरायानामा

जांच के मुताबिक भिलाई की हुसैनी इंटरप्राइजेस से अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने ₹16.61 करोड़ की बिक्री और ₹2.99 करोड़ की ITC दिखाई। फर्म के पते के लिए फूल सिंह के नाम किरायानामा लगाया गया था।

जीएसटी सत्यापन में पता चला कि फूल सिंह की 2010 में ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि उनके नाम पर कथित किरायानामा 21 मार्च 2025 का बनाया गया था।

एक अन्य मामले में भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्लाम ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के साथ कारोबार और बैंक खाते में लेन-देन से इनकार किया। इसके बावजूद फर्म के नाम पर ₹11.61 करोड़ की बिक्री और ₹2.08 करोड़ की ITC दिखाई गई।

इन फर्मों के नाम पर दिखाया गया कारोबार

जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार और ITC दर्शाई गई थी:

फर्म| दिखाई गई बिक्री| दिखाई गई ITC
अंसारी ट्रेडर्स| ₹30.71 करोड़| ₹5.52 करोड़
ललित ट्रेड लिंक| ₹29.72 करोड़| ₹5.17 करोड़
अगस्त इंटरप्राइजेस| ₹22.47 करोड़| ₹4.04 करोड़
विनायक वेंचर्स| ₹17.95 करोड़| ₹1.36 करोड़
हुसैनी इंटरप्राइजेस| ₹16.61 करोड़| ₹2.99 करोड़
महावीर इंटरप्राइजेस| ₹12.67 करोड़| ₹2.27 करोड़
यूनिक इंटरप्राइजेस| ₹11.61 करोड़| ₹2.08 करोड़

इसके अलावा तीन अन्य कंपनियों के नाम पर भी ITC का दावा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

कैसे होता है फर्जी बिलों का खेल?

जीएसटी फर्जीवाड़े के मामलों में आम तौर पर फर्जी दस्तावेज, गलत पते या संदिग्ध किरायानामे के जरिए कंपनियों का पंजीयन कराने के बाद बिना वास्तविक माल की खरीदी-बिक्री किए कागजों पर लेन-देन दिखाने का तरीका अपनाया जाता है।

इसके बाद इन बिलों के आधार पर खरीदार ITC का दावा करता है। जांच से बचने के लिए लेन-देन को कई फर्मों के बीच दिखाया जा सकता है, जिससे कागजों पर कारोबार वास्तविक नजर आए।

लेकिन जब जीएसटी विभाग संबंधित पते का भौतिक सत्यापन करता है या बैंक लेन-देन, ई-वे बिल और अन्य रिकॉर्ड का मिलान करता है, तो कथित फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं।

पुलिस ने शुरू की जांच

जीएसटी अधिकारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने अमन अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी संबंधित फर्मों के दस्तावेज, बैंक लेन-देन और कथित कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मामले में आगे और तथ्य सामने आने की संभावना है।

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