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मंत्रालय बस अग्निकांड के बाद बड़ा फैसला, शनिवार-रविवार को सभी स्टाफ बसों की होगी तकनीकी जांच

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रायपुर : नवा रायपुर में मंत्रालय कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाली बस में आग लगने की घटना के बाद प्रशासन ने स्टाफ बसों की सुरक्षा को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। शनिवार और रविवार को मंत्रालय की सभी स्टाफ बसों का विशेष संयुक्त तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। जांच में जो बसें फिटनेस या तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें तत्काल सेवा से बाहर किया जाएगा।

यह निर्णय कर्मचारियों के विरोध और बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद लिया गया है।

23 सितंबर को चलती बस में लगी थी आग

दरअसल, 23 सितंबर की शाम मंत्रालय कर्मचारियों को लेकर लौट रही बस क्रमांक 3073 में अचानक आग लग गई थी। देखते ही देखते बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। घटना राखी थाना क्षेत्र में हुई।

बस में सवार कर्मचारियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

कर्मचारियों ने जताया विरोध

बस अग्निकांड के बाद 24 सितंबर को मंत्रालय कर्मचारियों का आक्रोश सामने आया। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्रालय के डी-गेट के सामने एकत्र हुए और स्टाफ बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध जताया।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मंत्रालय स्टाफ के आवागमन में इस्तेमाल होने वाली कई बसें पुरानी और खराब स्थिति में हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बसों की स्थिति को लेकर पहले भी अधिकारियों को शिकायतें दी जा चुकी हैं। कुछ बसों के रास्ते में बंद होने की बात भी कर्मचारियों ने कही।

संघ ने सभी स्टाफ बसों की फिटनेस और तकनीकी स्थिति की निष्पक्ष जांच, पुरानी बसों को हटाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग रखी।

आपात बैठक के बाद लिए गए अहम फैसले

कर्मचारियों के विरोध के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उप सचिव की अध्यक्षता में आपात उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में NRDA, नगर निगम, बस ऑपरेटर और मंत्रालय कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में बसों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं बस ऑपरेटर से जवाब-तलब किया गया। कर्मचारी संघ की ओर से रखी गई मांगों पर चर्चा के बाद प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

शनिवार-रविवार को हर बस की होगी जांच

प्रशासन के निर्देश के अनुसार आगामी शनिवार और रविवार को परिवहन विभाग मंत्रालय की सभी स्टाफ बसों का संयुक्त तकनीकी परीक्षण करेगा।

इस दौरान बसों की फिटनेस और तकनीकी स्थिति की जांच की जाएगी। जो बसें निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें तत्काल सेवा से बाहर करने का निर्णय लिया गया है।

यानी अब सप्ताहांत में होने वाली जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि मंत्रालय के कर्मचारियों के आवागमन में चल रही कितनी बसें तकनीकी रूप से फिट हैं और कितनी बसों को हटाने की जरूरत है।

अक्टूबर से नई बसों का प्रावधान

प्रशासन ने अगले महीने होने वाले नए टेंडर में पुरानी बसों को हटाकर नई और आधुनिक बसों के संचालन का प्रावधान शामिल करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य मंत्रालय कर्मचारियों के आवागमन को अधिक सुरक्षित बनाना है।

जली हुई बस की भी होगी तकनीकी जांच

23 सितंबर को आग की चपेट में आई बस की भी निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच के जरिए आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

अब बस में दिखेगी फिटनेस रिपोर्ट

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्टाफ बस में फिटनेस सर्टिफिकेट और तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही चालक की हेल्थ रिपोर्ट भी बस में प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।

सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक बस में अग्निशामक यंत्र उपलब्ध रखना और इमरजेंसी एग्जिट गेट को चालू हालत में रखना भी अनिवार्य किया जाएगा।

बस पास सरेंडर करना भी होगा आसान

बैठक में कर्मचारियों की बस पास से जुड़ी समस्या पर भी निर्णय लिया गया है। जो कर्मचारी बस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और अपना बस पास सरेंडर करना चाहते हैं, वे अब सीधे अधीक्षण शाखा में पास जमा कर सकेंगे।

इसके लिए एनओसी या किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।

बसों की जांच पर कर्मचारी संघ रखेगा नजर

मंत्रालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पाण्डेय ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में होने वाले तकनीकी परीक्षण के दौरान संघ के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहेंगे और प्रत्येक बस की फिटनेस पर नजर रखेंगे।

संघ के मुताबिक प्रशासन द्वारा लिए गए फैसलों का जमीनी स्तर पर कितना पालन होता है, इसकी भी लगातार निगरानी की जाएगी।

अब सभी की नजरें सप्ताहांत में होने वाली मंत्रालय की स्टाफ बसों की तकनीकी जांच पर हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितनी बसें फिट पाई जाती हैं और कितनी को सेवा से बाहर किया जाता है।

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