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CM साय ने दिए अलर्ट रहने के निर्देश, छत्तीसगढ़ में बाढ़ का खतरा बढ़ा; गंगरेल के 14 गेट खुले

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। बस्तर से लेकर मध्य छत्तीसगढ़ तक नदी-नाले उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने भी 25 सितंबर को प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।

बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों से बारिश और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

CM साय ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी और परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

उन्होंने लोगों से नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों के पास नहीं जाने की अपील की है। जलमग्न पुल-पुलियों और सड़कों को पार करने से भी बचने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने बिजली के गिरे तारों से दूर रहने, बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने तथा भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में डायल 112 या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है।

गंगरेल बांध लबालब, सभी 14 गेट खोले गए

धमतरी के गंगरेल बांध में लगातार पानी की आवक बढ़ने से जलाशय पूरी क्षमता तक पहुंच गया। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार बांध 100 प्रतिशत भरने के बाद सभी 14 गेट खोल दिए गए हैं और महानदी में पानी की निकासी बढ़ाई गई है। इससे महानदी के जलस्तर और निचले इलाकों में संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

इससे पहले सुबह की स्थिति में गंगरेल के 10 गेट से 54,950 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय जलाशय में 64,117 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई थी।

प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश

छत्तीसगढ़ में इस मानसून अब तक सामान्य औसत बारिश का आंकड़ा पार हो चुका है। 25 सितंबर तक प्रदेश में 100.1 प्रतिशत सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। 1 जून से 25 सितंबर तक राज्य में औसतन 1082.4 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि की संभावित औसत वर्षा 1081.5 मिमी है।

लगातार बारिश के बीच बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।

जगदलपुर में बाढ़ जैसे हालात

बस्तर संभाग में लगातार बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। जगदलपुर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इंद्रावती नदी के सहायक नालों के उफान पर आने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।

गोरियाबहार नाला भरने से आसपास के गांवों में आवाजाही प्रभावित हुई है। अमागुड़ा क्षेत्र की निचली बस्ती में भी पानी भरने की सूचना है। कई परिवारों को सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा।

इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित एक फार्म हाउस में पानी भर गया। वहां लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद SDRF की टीम रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंची।

कांकेर में दूध नदी उफान पर, स्कूल बंद

कांकेर में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित किया है।

दूध नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों को सावधान किया गया। बारिश के कारण कई जगह पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ, जिन्हें पुलिस और संबंधित टीमों ने हटाया।

कोंडागांव में पुल-पुलियों के ऊपर बह रहा पानी

कोंडागांव में लगातार बारिश के कारण कई नदी-नाले उफान पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें जलमग्न होने और पुल-पुलियों के ऊपर पानी बहने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।

सुरक्षा को देखते हुए जिले में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर हालात का जायजा ले रही हैं और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

सुकमा में निचली बस्तियां खाली कराई जा रहीं

सुकमा जिले में भी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोंटा क्षेत्र की निचली बस्तियों में पानी भरने की स्थिति को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

डोंडरा पंचायत समेत कई क्षेत्रों में प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं। छिंदगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में भी बाढ़ जैसे हालात बताए जा रहे हैं। वहीं दोरनापाल-कोंटा और दोरनापाल-सुकमा मार्ग पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है।

सिकासार से छोड़ा जा रहा पानी

गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर क्षेत्र में भी लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। सिकासार जलाशय में जलभराव बढ़ने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पानी छोड़ा जा रहा है।

कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बढ़ा दी है।

धमतरी के दूसरे जलाशय भी लबालब

गंगरेल के साथ धमतरी जिले के अन्य जलाशयों में भी पानी तेजी से बढ़ा है। सुबह की उपलब्ध स्थिति के अनुसार मुरुमसिल्ली 100%, दुधावा 97.21% और सोढ़ुर 88.18% भर चुका था। गंगरेल में 64,117 क्यूसेक की आवक दर्ज की गई थी।

जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी और आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में सतर्कता बढ़ाई है।

बालोद में भी बारिश का असर

बालोद जिले में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। नदी-नालों और खेतों में पानी भर गया है। कई छोटे नालों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।

भारी बारिश को देखते हुए जिले के स्कूलों में भी अवकाश घोषित किया गया है। वहीं सियादेवी वाटरफॉल में पानी का प्रवाह बढ़ने के बावजूद लोगों से सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की जा रही है।

प्रशासन की नजर, लोगों से सावधानी की अपील

मौसम विभाग के मुताबिक 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश का खतरा बना हुआ है, जबकि अगले दिनों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। खासकर पानी के तेज बहाव वाली सड़कों और पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

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