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मानव तस्करी सिंडिकेट पर महासमुंद पुलिस का बड़ा प्रहार दो राज्यों में 10 ठिकानों पर दबिश, ₹1.48 करोड़ नकद समेत दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त

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महासमुंद :  नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने के अस्पताल मेमो से शुरू हुई जांच में महासमुंद पुलिस ने कथित मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। नुआपाड़ा पुलिस के सक्रिय सहयोग से छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सिंडिकेट से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। कार्रवाई में ₹1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपए नकद के अलावा बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए।पुलिस के अनुसार, जांच में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एडवांस राशि देकर ऋण-जाल में फंसाने, डर-धमकी का दबाव बनाकर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने और ईंट भट्ठों में बंधुआ मजदूरी कराने की बात सामने आई है। आरोप है कि नेटवर्क के जरिए बालिगों के साथ-साथ नाबालिगों को भी मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। जब्त मजदूर पलायन रजिस्टर, डायरी और अन्य दस्तावेजों की जांच में बड़ी संख्या में मजदूरों के कथित अवैध परिवहन और बंधुआ मजदूरी से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात पुलिस ने कही है।

40 हजार एडवांस देकर परिवार को भेजा था बाराबंकी
पुलिस के मुताबिक जनवरी 2026 में एक परिवार को ₹40 हजार एडवांस देकर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित ईंट भट्ठे में भेजा गया था। वहां परिवार से लंबे समय तक मजदूरी कराने तथा नाबालिग बालिका से भी कथित तौर पर बाल मजदूरी कराने की बात जांच में सामने आई। इसी दौरान भट्ठे के जेसीबी चालक पर नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप है। इस मामले की जानकारी अस्पताल मेमो के माध्यम से सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालनी शुरू कीं।

पांच आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई में मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पियुष अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के ठिकानों से मजदूर पलायन संबंधी रजिस्टर-डायरी, विभिन्न मोबाइल, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन जब्त की गई है। पुलिस ने थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 के तहत बीएनएस की धाराओं 143(2), 143(3), 143(4) एवं 3(5) में मामला दर्ज किया है तथा मामले में संगठित अपराध की धारा 111 जोड़ी गई है। पुलिस अब जब्त मोबाइलों के सीडीआर, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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