Home छत्तीसगढ़ SECL महाप्रबंधक मनोज कुमार ने किया जनसुनवाई स्थल का भूमि पूजन

SECL महाप्रबंधक मनोज कुमार ने किया जनसुनवाई स्थल का भूमि पूजन

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छाल में जनसुनवाई का गतिरोध खत्म, खेदापाली बांधापाली के ग्रामीणों ने दिया समर्थन

अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो रायगढ़ :- छाल खुली खदान के विस्तार को लेकर पिछले कई दिनों से ग्रामीणों और एसईसीएल प्रबंधन के बीच चल रहा गतिरोध आखिरकार तीन दिनों तक चली बैठकों और लगातार बातचीत के बाद समाप्त हो गया। खेदापाली, बांधापाली सहित प्रभावित गांवों के ग्रामीण जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार, मकानों का दोबारा सर्वे, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मांगों को लेकर जनसुनवाई से पहले अपनी बात मनवाने पर अड़े थे। इसी बीच बारिश के बावजूद ग्रामीणों ने जनसुनवाई स्थल पर टेंट लगाने का काम रुकवा दिया था। प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की लगातार बातचीत के बाद ग्रामीणों ने 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को समर्थन देने पर सहमति जताई और इसके बाद तैयारियां फिर शुरू हो गईं।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध का रास्ता अपनाया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक पुरानी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं होता, तब तक जनसुनवाई की तैयारी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसी क्रम में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बारिश के बीच जनसुनवाई स्थल पर पहुंच गए और टेंट लगाने का काम रुकवा दिया। ग्रामीण पूरे दिन मैदान में डटे रहे। सूचना मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की।

ग्रामीणों का मुख्य सवाल केवल प्रस्तावित खदान विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि पहले से प्रभावित परिवारों की समस्याओं के निराकरण का भी था। ग्रामीणों के अनुसार छाल क्षेत्र में खदान और रेलवे परियोजनाओं के कारण बड़ी मात्रा में भूमि पहले ही अधिग्रहित हो चुकी है। खेदापाली के ग्रामीणों ने दावा किया कि गांव की लगभग 80 प्रतिशत भूमि पूर्व में अधिग्रहण की प्रक्रिया में जा चुकी है और बची हुई भूमि खदान, रेलवे लाइन तथा जलाशय के बीच सीमित हो गई है। इसी आधार पर उन्होंने शेष भूमि के अधिग्रहण के साथ समुचित पुनर्वास की मांग रखी।

ग्रामीणों ने खदान में होने वाले विस्फोटों से मकानों में दरार और नुकसान होने का दावा भी किया। इसके अलावा कोयला परिवहन से उड़ने वाली धूल, भूजल स्तर में कथित गिरावट, कृषि भूमि की उत्पादकता, सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों का कहना था कि खनन और परिवहन गतिविधियां बढ़ने की स्थिति में स्थानीय लोगों, किसानों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है।

बांधापाली के ग्रामीणों ने पुनर्वास और रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाया। अधूरे मकान सर्वे को दोबारा कराने, वर्तमान में वयस्क हुए प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का लाभ देने तथा जिन परिवारों को अब तक पुनर्वास नहीं मिला है, उन्हें निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जमीन या मुआवजा देने की मांग रखी गई। भूमिहीन प्रभावित परिवारों को रोजगार, कम भूमि वाले प्रभावित भू-स्वामियों को नौकरी और संयुक्त खातों से प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार की मांग भी सामने आई।

ग्रामीणों ने बांधापाली में लगभग 60 से 70 एकड़ ऐसी जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा भी उठाया, जिसे उनके अनुसार अब तक एसईसीएल ने अधिग्रहित नहीं किया है। प्रस्तावित पुनर्वास स्थल को लेकर भी ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां रखीं।

मामला केवल जमीन और रोजगार तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल बस, स्वास्थ्य सुविधा और एंबुलेंस जैसी मूलभूत जरूरतों को भी मांगों में शामिल किया। प्रभावित बच्चों की शिक्षा और एसईसीएल द्वारा संचालित विद्यालय में प्रवेश से जुड़ी परेशानियों का मुद्दा भी उठाया गया। क्षेत्र में कुछ स्ट्रीट लाइटों के काम नहीं करने और स्थानीय स्तर पर सीएसआर के माध्यम से अपेक्षित विकास कार्य नहीं होने का दावा भी ग्रामीणों ने किया।

ग्रामीणों ने पूर्व में हुई बैठकों और दिए गए ज्ञापनों का हवाला देते हुए तहसीलदार छाल के आदेश क्रमांक 699/2022 दिनांक 27 अक्टूबर 2022 तथा एसईसीएल उपक्षेत्रीय प्रबंधन के पत्र क्रमांक 3001/2022 दिनांक 12 दिसंबर 2022 से जुड़े मामलों के निराकरण की मांग भी सामने रखी।

तीन दिन की बातचीत ने बदली तस्वीर

विरोध के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों और एसईसीएल प्रबंधन के बीच बातचीत का सिलसिला तेज किया। एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में लगातार बैठकों का दौर चला। शनिवार को हुई निर्णायक बैठक में धरमजयगढ़ एसडीएम, छाल तहसीलदार लोमेश मीरी, एसडीओपी खरसिया, छाल थाना प्रभारी अनवर अली खान, एसईसीएल महाप्रबंधक मनोज कुमार तथा छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेन्द्रनाथ सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों को बिंदुवार सुना और नियमानुसार उनके निराकरण को लेकर चर्चा की। प्रबंधन की ओर से लिखित और मौखिक आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी की मांग को स्वीकार किए जाने तथा अन्य मांगों के निराकरण की दिशा में सहमति जताई गई। इसके बाद ग्रामीणों ने जनसुनवाई के समर्थन पर सहमति व्यक्त की।

लिखित आश्वासन के बाद शुरू हुई तैयारियां

सहमति बनने के बाद प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से जनसुनवाई स्थल पर तैयारियों की शुरुआत की गई। जिस मैदान में कुछ समय पहले ग्रामीण बारिश के बीच डटे रहकर टेंट लगाने का काम रुकवा रहे थे, उसी स्थान पर अब जनसुनवाई की तैयारियां आगे बढ़ने लगीं।

स्थानीय देवी-देवताओं के आवाहन के साथ भूमिपूजन

सहमति के बाद जनसुनवाई स्थल पर स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं का आवाहन करते हुए पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार किया गया। इसके बाद एसईसीएल महाप्रबंधक मनोज कुमार, छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेन्द्रनाथ तथा वरिष्ठ ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से श्रीफल फोड़कर जनसुनवाई स्थल का भूमिपूजन किया। क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और 29 सितंबर को होने वाली जनसुनवाई के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रार्थना की गई।

भूमिपूजन कार्यक्रम में जनसुनवाई के नोडल अधिकारी के.के. भोई, एरिया कार्मिक विभाग से ए.डी. टंडन, छाल कार्मिक विभाग से रामा कृष्ण, राजस्व विभाग से सेठी, सिविल विभाग से मिश्रा, सुरक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। मजदूर संगठनों की ओर से यूनियन प्रतिनिधि डी.एल. ग्वालबांसी, आशीष पटेल, सुरेश सिंह, ननकी साहू, रिपु पांडे, बेनू गबेल , घनश्याम सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित रहे।

अब 29 सितंबर की जनसुनवाई पर नजर

छाल खदान विस्तार को लेकर बारिश में टेंट रुकवाने से शुरू हुआ विरोध अब तीन दिन की बातचीत, लिखित आश्वासन और ग्रामीणों की सहमति तक पहुंच चुका है। अब 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई में परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे सामने आने की संभावना है।

ग्रामीणों के लिए जनसुनवाई अपनी आपत्तियां और मांगें आधिकारिक रूप से रखने का मंच होगी, जबकि प्रबंधन और प्रशासन के पक्ष भी इसी प्रक्रिया में दर्ज होंगे। वहीं जिन मांगों पर आश्वासन दिया गया है, उनका वास्तविक क्रियान्वयन आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल प्रशासन, ग्रामीणों और एसईसीएल प्रबंधन के बीच बातचीत से गतिरोध समाप्त हो गया है और जनसुनवाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अब सबकी नजर 29 सितंबर की जनसुनवाई पर रहेगी, जहां छाल खदान विस्तार से जुड़े विभिन्न पक्षों की बात आधिकारिक रूप से सामने आएगी।

इस मामले में एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली आधिकारिक जानकारी तथा आगे होने वाली कार्रवाई को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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