बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र में स्थित एक अस्थायी गौठान में मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। झलमला गांव के ग्रामीणों ने दो दिनों के भीतर 20 से ज्यादा मवेशियों की मौत का दावा किया है। वहीं गांव के सरपंच धनलाल साहू ने 14 मवेशियों की मौत होने की बात कही है।
मौतों की खबर सामने आने के बाद अस्थायी गौठान की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने मृत मवेशियों की वास्तविक संख्या और उनकी मौत के कारणों की जांच कराने की मांग की है।
बारिश के बाद गौठान में फैला कीचड़
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार बारिश होने के कारण गौठान परिसर में जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा हो गया है। इससे वहां रखे गए मवेशियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौठान में मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा, पानी और बारिश से बचाव की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दो महीने पहले बनाया गया था अस्थायी गौठान
जानकारी के मुताबिक, करीब दो महीने पहले खुले मैदान में फेंसिंग कर अस्थायी गौठान तैयार किया गया था। एक समय यहां 300 से अधिक मवेशियों के मौजूद होने की बात सामने आई है।
अब बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत के बाद ग्रामीणों ने गौठान की व्यवस्थाओं और पशुओं की देखरेख को लेकर सवाल उठाए हैं।
मौत की असली वजह जानने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि केवल मौतों की संख्या सामने आना पर्याप्त नहीं है। यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि मवेशियों की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मृत पशुओं की संख्या का सत्यापन कराने, पोस्टमार्टम/पशु चिकित्सा जांच कराने और मौत के वास्तविक कारणों की जांच की मांग की है।
फिलहाल ग्रामीणों के दावे और सरपंच द्वारा बताई गई संख्या में अंतर है। ऐसे में प्रशासनिक और पशु चिकित्सा जांच के बाद ही मवेशियों की मौत की वास्तविक संख्या और कारण स्पष्ट हो सकेंगे।




