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जनसुनवाई के बाद रातों-रात 5 फीट की दीवार! नवापारा में जमीन कब्जे का खेल, मुआवजे की उम्मीद में ‘भू-माफिया’ सक्रिय?

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ग्रामीणों का आरोप—29 सितंबर की जनसुनवाई के बाद सरकारी जमीन पर शुरू हुआ कब्जा; रातों-रात खड़ी कर दी दीवार, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो रायगढ़ : छाल तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत नवापारा में शासकीय और श्मशान भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद अब गंभीर होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि 29 सितंबर को SECL से संबंधित जनसुनवाई होने के बाद कुछ मौका परस्त लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जे की गतिविधियां तेज कर दीं और रातों-रात करीब चार से पांच फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई।ग्रामीणों के अनुसार यह सिर्फ जमीन पर कब्जे का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे भविष्य में संभावित भू-अर्जन और मुआवजे की उम्मीद भी एक वजह हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयलांचल क्षेत्र होने के कारण आने वाले समय में इस इलाके की जमीन भू-अर्जन के दायरे में आ सकती है। ऐसे में कुछ लोग यह सोचकर सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं कि जमीन का स्वामित्व भले न मिले, लेकिन यदि वहां निर्माण या मलवा दर्ज हो गया तो भविष्य में मुआवजे का दावा खड़ा किया जा सकता है।

हालांकि मुआवजा किस स्थिति में और किसे देय होगा, यह पूरी तरह संबंधित भू-अर्जन कानून, राजस्व रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करता है। इसलिए इस पूरे मामले की जांच प्रशासनिक स्तर पर किया जाना जरूरी है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए रातों-रात दीवारें खड़ी की जाने लगें और प्रशासन को इसकी जानकारी बाद में मिले, तो यह सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।नवापारा में 3 तारीख को हुई ग्राम सभा में भी जमीन कब्जे के मुद्दे को लेकर जमकर विवाद हुआ। ग्रामीणों ने पंचायत के सामने मामला उठाया। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत स्तर पर मामला सुलझाने की बात हुई, लेकिन बाद में सरपंच और सचिव ने इसे राजस्व विभाग और तहसील कार्यालय से संबंधित मामलाबताते हुए वहीं कार्रवाई के लिए भेज दिया।ग्रामीणों का कहना है कि नवापारा में जमीन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। पहले भी शासकीय तथा बाजार मद की जमीन पर कब्जे और निर्माण के आरोप सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिकायतें होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कथित अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़े हैं।

अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मौके का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सीमांकन किया जाए और जिस जमीन पर रातों-रात दीवार खड़ी की गई है उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जमीन शासकीय या श्मशान मद की पाई जाती है तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के पास कार्रवाई करने के लिए अभी भी समय है। यदि आज सरकारी जमीन पर खड़ी की गई दीवार को नजरअंदाज किया गया तो कल इसी जमीन पर पक्का निर्माण खड़ा हो सकता है और बाद में इसे हटाना प्रशासन के लिए और मुश्किल हो जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या संभावित भविष्य के मुआवजे की उम्मीद में सरकारी जमीन पर कब्जे का रास्ता खुला छोड़ा जा सकता है?

ग्रामीणों का प्रशासन से आग्रह है कि इस मामले को सामान्य जमीन विवाद मानकर टालने के बजाय गंभीरता से लिया जाए। सरकारी जमीन, श्मशान भूमि , बाजार की प्रस्तावित भूमि, सिंचाई विभाग द्वारा भू अर्जन भूमि और पंचायत की सार्वजनिक उपयोग की जमीन को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल जांच और कार्रवाई की जाए।
नवापारा के ग्रामीणों की मांग साफ है—सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी कीमत पर न होने दिया जाए और यदि कब्जा किया गया है तो उसे तत्काल हटाकर जमीन को सुरक्षित किया जाए।अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में दीवार बनने का इंतजार करता है या सरकारी जमीन बचाने के लिए समय रहते कार्रवाई करता है।

क्या कहते है, नवापारा हल्का पटवारी ,रज्जू राठिया

ग्रामीणों के शिकायत पर मौके में जांच का रिपोर्ट तहसील कार्यालय में जमा कर दिया गया है।

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