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सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर बड़ा हमला! हूतियों का दावा-‘अरामको पर बरसाई मिसाइलें’

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रियाद : पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। हूती संगठन ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सऊदी अरामको की एक तेल फैसिलिटी को बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी के मुताबिक, हमले में कथित तौर पर लक्षित ठिकानों को नुकसान पहुंचा और आग लग गई।

हालांकि, सऊदी अरब ने रियाद में अरामको पर ऐसे किसी हमले के हूती दावे को खारिज कर दिया है। सऊदी नेतृत्व वाले यमन गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने हूतियों के दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि संगठन अपने नुकसान से ध्यान हटाने के लिए ‘काल्पनिक जीत’ दिखाने की कोशिश कर रहा है।

रियाद में आग और धुएं का दावा

हूती समर्थित मीडिया चैनल अल-मसीरा ने याह्या सरी के हवाले से बताया कि रियाद में अरामको को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन चलाया गया। हूती पक्ष ने दावा किया कि हमले के बाद अरामको की एक फैसिलिटी के आसपास आग और धुएं का गुबार देखा गया।

इस घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आने का भी दावा किया गया है, लेकिन इनसे हमले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी रियाद में अरामको पर हमले की बात स्वीकार नहीं की है।

सऊदी ने हूतियों के दावे को बताया ‘काल्पनिक जीत’

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूती संगठन ताइज के मोर्चे पर हुए अपने कथित नुकसान से लोगों का ध्यान हटाने के लिए रियाद पर हमले की कहानी सामने ला रहा है। सऊदी पक्ष का कहना है कि हूती अपने नुकसान को छिपाने के लिए इस तरह के दावे कर रहे हैं।

यानबू में भी अरामको को निशाना बनाने का दावा

यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने का दावा किया हो। इससे पहले यानबू इलाके और वहां के पोर्ट को भी निशाना बनाए जाने की बात हूती पक्ष की ओर से कही गई थी। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने छह मिसाइलों को रोकने का दावा किया था।

हूतियों की ओर से लगातार सऊदी अरब के तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकियां दी जा रही हैं। ऐसे हमलों की आशंका से क्षेत्रीय तनाव के साथ-साथ वैश्विक तेल और गैस बाजार पर असर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

‘नाकाबंदी नहीं हटी तो जारी रहेंगे हमले’

हूती संगठन का आरोप है कि सऊदी अरब ने उसके खिलाफ नाकाबंदी लगा रखी है। संगठन का कहना है कि जब तक कथित नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक सऊदी शहरों को निशाना बनाना जारी रखा जाएगा।

हूतियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सऊदी अरब की ओर से बड़ा सैन्य हमला किया गया तो उसका जवाब उससे भी बड़े हमले के जरिए दिया जाएगा।

यमन में सऊदी की ताबड़तोड़ एयर स्ट्राइक

रियाद पर कथित हमले के दावे के बीच यमन में सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई तेज होने की खबरें हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी लड़ाकू विमानों ने सना, सादा, ताइज, हज्जा, अमरान और अल-बायदा समेत कई इलाकों में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए।

रिपोर्ट में पांच घंटे के भीतर 90 से ज्यादा हवाई हमलों का दावा किया गया है। हूती पक्ष का कहना है कि अकेले राजधानी सना में 26 हवाई हमले किए गए। हालांकि, हमलों की संख्या और उनसे हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सना और सादा में भी भारी बमबारी

सना को हूती संगठन का प्रमुख गढ़ माना जाता है। हूती पक्ष के मुताबिक, राजधानी में लगातार हवाई हमले किए गए। इसके अलावा सादा में भी भारी बमबारी की गई। रिपोर्टों में वहां हूती मीडिया से जुड़े एक कम्युनिकेशन सेंटर को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।

इससे पहले हूतियों ने सऊदी अरब का एक लड़ाकू विमान मार गिराने का भी दावा किया था, हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

ताइज में 260 हूती लड़ाकों के मारे जाने का दावा

यमन के ताइज इलाके में हवाई हमलों के साथ जमीन पर भी संघर्ष जारी रहने की खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की सेना हूती ठिकानों और उनकी सैन्य सप्लाई को निशाना बना रही है।

अदन स्थित सबा न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यमनी सशस्त्र बलों ने तुर अल-बाहा और ताइज मोर्चों पर हूती लड़ाकों की मदद के लिए पहुंच रहे सुदृढ़ीकरण को रोकने के लिए 97 ऑपरेशन किए। इन कार्रवाइयों में 260 हूती लड़ाकों के मारे जाने या निष्क्रिय होने तथा 44 सैन्य वाहनों और सप्लाई साधनों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल रियाद में अरामको पर कथित हमले को लेकर दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने हैं। ऐसे में वास्तविक स्थिति और हमले से हुए नुकसान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है। वहीं, यमन में जारी हवाई और जमीनी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

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