सूरजपुर : जिले में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही और फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हाथी-मानव संघर्ष की समस्या को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण वन विभाग के घोई कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि रमकोला, घोई, भेलकच्छ, अर्चोका और घाट सहित आसपास के कई गांवों में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है। हाथियों के खेतों में पहुंचने से फसलों को नुकसान हो रहा है। वहीं ग्रामीणों को अपनी जान की सुरक्षा के साथ-साथ खेती-किसानी को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
हाथियों को पकड़कर पुनर्वास केंद्र में रखने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि लगातार उत्पात मचा रहे जंगली हाथियों को तत्काल पकड़ा जाए और उन्हें तमोर पिंगला के रमकोला स्थित हाथी पुनर्वास केंद्र में रखा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल तत्काल राहत देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
फसल नुकसान पर 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने हाथियों से फसल नुकसान के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग भी की है। उन्होंने मुआवजा राशि बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रति एकड़ किए जाने की मांग रखी।
इसके अलावा हाथी के हमले में जनहानि होने की स्थिति में प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा या परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि फसल नुकसान का मुआवजा 15 दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही पुराने मामलों में लंबित मुआवजा राशि का भी तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, 11 नंबर बनारस रोड पर चक्काजाम की चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों द्वारा फसल बर्बाद किए जाने के बावजूद कई किसानों को अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। इससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन और वन विभाग को एक सप्ताह का समय दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 11 नंबर बनारस रोड पर बड़ी संख्या में लोग चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल तक ले जाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। हाथियों की लगातार आवाजाही और उससे पैदा हो रहे खतरे को देखते हुए प्रशासन को हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी समाधान तलाशना होगा। अब ग्रामीणों के अल्टीमेटम के बाद वन विभाग और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।




