बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों और उनमें हुए प्रवेश को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रिकॉर्ड पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी स्कूलों से संबंधित सही, पूर्ण और सत्यापित रिकॉर्ड अगली सुनवाई में पेश किया जाना चाहिए। इसके लिए शासन को अंतिम अवसर दिया गया है।
चीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। यह मामला भगवंत की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि राज्य शासन की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड में कई बड़े निजी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या शून्य अथवा बेहद कम बताई गई है। याचिकाकर्ता पक्ष ने इन आंकड़ों की वास्तविक स्थिति से तुलना करते हुए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
रिकॉर्ड पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने शासन की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड पर असंतोष जताया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट के साथ इस तरह मजाक नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि वर्ष 2016 में दिए गए पूर्व आदेशों के बावजूद उनका उचित तरीके से पालन नहीं किया गया है। कोर्ट ने अब राज्य शासन को सभी स्कूलों का वास्तविक और सत्यापित रिकॉर्ड जुटाकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
18 नवंबर तक पेश करना होगा पूरा डेटा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में प्रदेश के सभी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों और उनसे संबंधित बच्चों का सही एवं पूर्ण रिकॉर्ड पेश किया जाए।
कोर्ट ने 18 नवंबर तक का समय देते हुए इसे शासन के लिए अंतिम अवसर बताया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तारीख तक सभी स्कूलों का सही डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मामले की अगली सुनवाई अब 18 नवंबर को होगी।




