सक्ती: सक्ती विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखराम भगत के साथ दंतेवाड़ा में आयोजित लोकतंत्र देश बचाओ के तत्वाधान में आयोजित लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ काला दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए जहां नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत ने कहा तानाशाही सरकार द्वारा लोकतंत्र की मर्यादाओं को तार तार कर दिया गया है शांतिपूर्ण तरीके निर्वाचन आयोग से जवाब देही मांगने जा रहे लोकसभा विपक्ष नेता राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के सांसदों पर पुलिस द्वारा अमानवीय व्यवहार करते हुए पुलिस द्वारा कांग्रेस सांसदों को बलपूर्वक हिरासत में लिया गया इससे यही प्रतीत होता है भाजपा सरकार द्वारा बाबा साहेब के संविधान पर हमला किया जा रहा है जिसको लेकर पूरे देश में काला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है जिसके तहत हमारे द्वारा चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने हिरासत में लेकर उच्च स्तरीय जांच और जब तक चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा तब तक जमीन से लेकर सदन तक यह लड़ाई जारी रहेगी , सुखदेव भगत प्रदेश प्रभारी ने बताया अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ को लेकर विधायकों के साथ काला दिवस मनाया जा रहा है जिसमें हमारे मुख्य मांगे हैं मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना एवं जांच हेतु मुकदमा दर्ज करने तथा चुनावी शुचिता की बहाली के संबंध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जा रहा है जिसमें भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मचे गंभीर संवैधानिक संकट की ओर आकर्षित करना किया गया है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निम्नलिखित 10 बिंदुओं के आधार पर कार्रवाई की बात कही गई है.
चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय (Collegiate) संस्था है, जहाँ फैसले पूरे आयोग की सहमति से होने चाहिए। ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति और जानकारी के बिना एकतरफा फैसला लिया, जो सुप्रीम कोर्ट के ‘टी.एन. शेषन मामले’ के ऐतिहासिक निर्णय का सीधा उल्लंघन है। संस्थागत आंतरिक मतभेदों को दबाना (Ignoring Internal Dissent) सहयोगी चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) द्वारा पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इन गंभीर आपत्तियों को ‘फुल कमीशन’ का फैसला बताकर लागू किया गया, जो आयोग के लोकतांत्रिक ढांचे की हत्या है।वोट चोरी’ और ‘मैच फिक्सिंग’ के विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। मतदान के अधिकारों पर यह आघात लोकतांत्रिक रूप से चुनी जाने वाली सरकारों की संवैधानिक वैधता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितता
मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान आनन-फानन में लाखों वैध मतदाताओं के नाम काटने और नए नाम जोड़ने में भारी विसंगतियां की गईं, जिससे बड़े पैमाने पर लोग मतदान से वंचित हो गए हैं.
मतदाता पंजीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण वैधानिक प्रपत्र (Statutory Form 6) में अन्य आयुक्तों की मंजूरी या उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना अनधिकृत बदलाव किए गए, जो पूरी तरह गलत है।संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है। परंतु, एकतरफा और अपारदर्शी कार्यप्रणाली से देश के नागरिकों का चुनाव प्रणाली से भरोसा उठ रहा है, जो ‘संविधान के मूल ढांचे’ (Basic Structure) पर हमला है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले में चुनाव आयोग की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के जो निर्देश दिए गए थे, ज्ञानेश कुमार के हालिया प्रशासनिक कदमों ने उन न्यायिक सिद्धांतों की जानबूझकर अवहेलना किया गया है मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के मुखिया के रूप में कार्य करने के बजाय सत्तापक्ष के राजनीतिक एजेंडे और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के दबाव में आकर फैसला लिया है, जिससे आयोग की निष्पक्षता समाप्त हो गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत बनाई गई नई चयन प्रक्रिया के माध्यम से की गई नियुक्तियों ने शुरू से ही आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर किया, जिसके दुष्परिणाम आज देश के सामने हैं।
हमारी मुख्य मांगें (Our Core Demands):
तत्काल निष्कासन (Removal): लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तुरंत बर्खास्त किया जाए या उनके खिलाफ संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए। चुनावी डेटा के साथ चुनाव आयोग के भीतर पिछले 10 महीनों में लिए गए सभी विवादित फैसलों, मतदाता सूची से नाम हटाने और डेटा केंद्रीकरण के मामलों की सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराए जाने को लेकर राष्ट्रपति का नाम ज्ञापन सोंपा गया निशा सरकार प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज प्रदेश सह प्रभारी संपथ कुमार , जरिता लेफ्तलांग, विजय जांगिड़, राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलों देवी नेताम, पूर्व विधायक श्रीमती देवती कर्मा, लखेश्वर बघेल , पूर्व मंत्री मोहन मरकाम, सहित जिला नगर ब्लॉक स्तर के कांग्रेस पदाधिकारी कार्यकर्ता सदस्य गण हजारों की संख्या में उपस्थित थे




