आधा हाईवे में उजाला आधे में पसरा अंधेरा, हादसे की आशंका
एक माह से बंद हैं लाइटें, जिम्मेदारी तय नहीं होने से ग्रामवासी और राहगीर परेशान
महासमुंद : राष्ट्रीय राजमार्ग 353 से लगे ग्राम पंचायत खरोरा क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल भुगतान को लेकर महासमुंद पालिका और ग्राम पंचायत के बीच सीमा विवाद शुरु हो गया है। करीब एक माह पहले नगर पालिका द्वारा पंचायत क्षेत्र में लगी स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भुगतान करने से इन्कार किए जाने के बाद विद्युत विभाग ने कनेक्शन की आपूर्ति बंद कर दी है, इसके बाद हाईवे के इस हिस्से में रात के समय अंधेरा पसरा रहता है। इससे राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।जानकारी के अनुसार महासमुंद शहर से लगे ग्राम पंचायत खरोरा की सीमा में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं। इन लाइटों के बिजली बिल का भुगतान अब तक नगर पालिका द्वारा किया जाता रहा है। नगर पालिका का तर्क है कि लाइटें उसकी सीमा से बाहर ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे में नगर पालिका के मद से पंचायत क्षेत्र की लाइटों का बिजली बिल भुगतान करना उचित नहीं है। पालिका ने इसी आधार पर भुगतान से हाथ खींच लिया, जिसके बाद बिजली आपूर्ति बंद हो गई।
पंचायत ने जिम्मेदारी लेने से किया इंकार
ग्राम पंचायत खरोरा का कहना है कि इन स्ट्रीट लाइटों की स्थापना पंचायत द्वारा नहीं कराई गई है। इसलिए इनके बिजली बिल का भुगतान करने की जिम्मेदारी भी पंचायत की नहीं है। पंचायत क्षेत्र में होने के बावजूद लाइटों के स्वामित्व और स्थापना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिणामस्वरूप दोनों निकायों के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद बना हुआ है।
निर्माण विभाग उठाए पंचायत का खर्च
सीएमओ सौरभ शर्मा का कहना है कि सरकारी राशि का उपयोग नियमानुसार संबंधित निकाय की सीमा और जिम्मेदारी के अनुसार ही किया जाना चाहिए। पंचायत क्षेत्र में आने वाली स्ट्रीट लाइटों का खर्च पंचायत अथवा उस विभाग को उठाना चाहिए, जिसने इनका निर्माण या स्थापना कराई है। पालिका ने प्रशासन से लाइटों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय करने की अपेक्षा जताई है।
प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने की मांग
करीब एक माह से नेशनल हाईवे 53 पर स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रात के समय इस मार्ग से बड़ी संख्या में वाहन और ग्रामीण आवागमन करते हैं। अंधेरे के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने स्ट्रीट लाइटों की स्थापना, स्वामित्व और बिजली बिल भुगतान की जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि निकायों के बीच चल रहे सीमा विवाद का खामियाजा आम लोगों को नहीं भुगतना चाहिए। प्रशासन को जल्द निर्णय लेकर हाईवे पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।




