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भारतीय IT कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई का कोई खास असर नहीं, ग्रीन कार्ड के आवेदनों में भारी गिरावट

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नई दिल्ली :अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से नौकरी पर रखने की प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ गई है। अमेरिकी प्रशासन ने TCS, Infosys, Wipro और HCL Technologies समेत 8 बड़ी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की कार्रवाई की है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों की ओर से ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले आवेदनों में पहले ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में इस कार्रवाई का कंपनियों के कामकाज पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

 TCS, Infosys समेत 8 कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में

अमेरिका ने गुरुवार को आठ कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक, कैपजेमिनी, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन की प्रक्रिया अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। इन कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं, इसलिए इस फैसले पर भारतीय IT सेक्टर की नजर बनी हुई है।

 TCS के ग्रीन कार्ड आवेदनों में बड़ी गिरावट

PERM आवेदनों के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि TCS ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2024 में ग्रीन कार्ड के लिए 1,804 आवेदन किए थे। 2025 में यह संख्या घटकर 513 रह गई, जबकि 2026 में कंपनी ने केवल 2 आवेदन किए।

HCL Technologies ने 2025 में 323 आवेदन किए थे, लेकिन 2026 में यह संख्या घटकर 59 रह गई।

विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन किए थे। वर्ष 2024 में उसके 169 आवेदन खारिज हुए, जबकि 88 आवेदन वापस ले लिए गए।

वहीं, इन्फोसिस के लिए 2024 में PERM के तहत 87 आवेदन दर्ज किए गए थे। वर्ष 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ प्रमुख भारतीय IT कंपनियों की ओर से ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले आवेदनों में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, केवल आवेदनों की संख्या के आधार पर अमेरिकी कार्रवाई के कुल प्रभाव का आकलन नहीं किया जा सकता।

 PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय IT कंपनियों की हिस्सेदारी 2% से कम

HCL Tech के पूर्व CEO विनीत नायर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि पिछले साल जारी किए गए कुल 1,17,849 PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय IT कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से भी कम थी। उनके मुताबिक, यह कुल संख्या के 2 प्रतिशत से भी कम है।

इस आंकड़े के आधार पर उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी कार्रवाई का प्रत्यक्ष असर शुरुआती अनुमानों की तुलना में सीमित हो सकता है।

हालांकि, यह आकलन भारतीय IT कंपनियों की हिस्सेदारी से जुड़ा है। इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों, भविष्य में होने वाले आवेदनों या कंपनियों की दीर्घकालिक भर्ती रणनीति पर पड़ने वाले असर का पूरा अनुमान नहीं मिलता।

कैपजेमिनी और कॉग्निजेंट के आवेदन कितने?

PERM ट्रैकर के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कैपजेमिनी ने 2024 में 300, 2025 में 361 और 2026 में 98 आवेदन किए।

कॉग्निजेंट ने 2024 में 1,236 आवेदन किए थे। कंपनी के 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि संबंधित कंपनियों के आवेदन की संख्या अलग-अलग रही है। इसलिए अमेरिकी कार्रवाई के असर को समझने के लिए प्रत्येक कंपनी के आवेदन, मंजूरी और कर्मचारियों की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।

क्या है PERM प्रक्रिया और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?

PERM यानी स्थायी श्रम प्रमाणन अमेरिका में विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी पर रखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। सामान्य तौर पर नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए निर्धारित श्रम बाजार संबंधी शर्तें पूरी की गई हैं।

PERM प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र मामलों में नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार-आधारित इमिग्रेंट याचिका दायर कर सकता है। इसके बाद ग्रीन कार्ड यानी अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया के अन्य चरण आते हैं।

इसलिए PERM कार्यक्रम से निलंबन का असर कंपनियों की नई स्थायी नियुक्तियों और संबंधित कर्मचारियों की इमिग्रेशन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव निलंबन की शर्तों, अवधि और संबंधित मामलों की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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