Home छत्तीसगढ़ रजिस्ट्री के लिए पटवारी के चक्कर क्यों? सक्ती-डभरा मे चौहद्दी-बटांकन की कथित...

रजिस्ट्री के लिए पटवारी के चक्कर क्यों? सक्ती-डभरा मे चौहद्दी-बटांकन की कथित अनिवार्यता पर सवाल

0

शासन के पंजीयन पोर्टल पर भूमि संबंधी अभिलेखों का प्रावधान, लेकिन हर रजिस्ट्री से पहले बटांकन अनिवार्य होने का स्पष्ट सामान्य नियम उपलब्ध मार्गदर्शिका में नहीं मिला; पक्षकारों ने लगाए 3 से 4 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च के आरोप

सक्ती :जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए लोगों को उप-पंजीयक कार्यालय और पटवारी कार्यालय के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सक्ती और डभरा में नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ पक्षकारों ने बताया कि पटवारी से चौहद्दी और बटांकन कराए बिना उनकी जमीन की रजिस्ट्री करने से मना किया जा रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। कुछ पक्षकारों ने इस प्रक्रिया में 3 से 4 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च होने का आरोप लगाया है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रत्येक जमीन की रजिस्ट्री से पहले पटवारी से चौहद्दी और बटांकन कराना शासन के नियमों के तहत अनिवार्य है? यदि ऐसा कोई नियम लागू है, तो संबंधित आदेश या परिपत्र आम नागरिकों के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है?

पंजीयन पोर्टल पर भूमि अभिलेखों की व्यवस्था

छत्तीसगढ़ शासन के पंजीयन विभाग के ऑनलाइन पंजीयन तंत्र में संपत्ति का विवरण, खसरा क्रमांक और भूमि से संबंधित जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था है। पंजीयन प्रक्रिया की उपयोगकर्ता मार्गदर्शिका में बी-1, पी-1, भू नक्शा, किसान किताब तथा भूमि के नक्शे से संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख मिलता है। मार्गदर्शिका में निर्धारित अनिवार्य दस्तावेजों और विवरणों के अनुसार जानकारी प्रस्तुत करने की प्रक्रिया बताई गई है।

उपलब्ध मार्गदर्शिका के आधार पर प्रत्येक विक्रय विलेख के पंजीयन से पहले पटवारी से चौहद्दी और बटांकन कराना अनिवार्य होने का कोई स्पष्ट सामान्य प्रावधान सामने नहीं आया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी विशेष प्रकार की भूमि, दस्तावेज या परिस्थिति में अतिरिक्त अभिलेख की मांग से संबंधित कोई अलग नियम या निर्देश अस्तित्व में नहीं है। इसकी पुष्टि संबंधित विभाग के वर्तमान आदेशों और लागू नियमों से की जानी आवश्यक है।

यदि बटांकन अनिवार्य है, तो आदेश सार्वजनिक हो

यदि सक्ती या डभरा के उप-पंजीयक कार्यालय में चौहद्दी और बटांकन को रजिस्ट्री की अनिवार्य पूर्व शर्त बताया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को इसका लिखित आधार स्पष्ट करना चाहिए। क्या यह शर्त किसी शासन आदेश, विभागीय परिपत्र, अधिसूचना या विशेष परिस्थिति में लागू निर्देश के तहत लगाई जा रही है? यदि ऐसा कोई आदेश है, तो उसका क्रमांक, दिनांक और प्रति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इससे पक्षकारों को पहले से पता चल सकेगा कि रजिस्ट्री के लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं और किन परिस्थितियों में अतिरिक्त राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करना होगा। इससे अनावश्यक भ्रम और कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या भी कम हो सकती है।

पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टता जरूरी

राजस्व विभाग के भुइयाँ पोर्टल पर खसरा, बी-1, नक्शा और नामांतरण से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं। जमीन के पंजीयन के बाद राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया भी संचालित होती है। पंजीयन और नामांतरण संबंधित, लेकिन अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए किसी मामले में बटांकन या अन्य राजस्व अभिलेख की आवश्यकता है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित भूमि की स्थिति और लागू नियमों के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।

अतिरिक्त खर्च के आरोपों की जांच जरूरी

पक्षकारों का कहना है कि रजिस्ट्री की तैयारी के दौरान उन्हें पटवारी कार्यालय भेजे जाने से समय और धन दोनों खर्च होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुछ पक्षकारों ने चौहद्दी और बटांकन के नाम पर 3 से 4 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च होने का आरोप लगाया है।

हालांकि, इस राशि के संबंध में अभी कोई स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण या विभागीय पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि कथित खर्च निर्धारित शासकीय शुल्क से संबंधित है या किसी अन्य मद में भुगतान किया जा रहा है। यदि कोई शुल्क लिया जाता है, तो उसकी दर, रसीद और आधिकारिक आधार की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

जिला प्रशासन और पंजीयन विभाग से पांच अहम सवाल

– क्या प्रत्येक जमीन की रजिस्ट्री से पहले चौहद्दी और बटांकन कराना अनिवार्य है?
– यदि अनिवार्य है, तो संबंधित शासन आदेश या विभागीय परिपत्र का क्रमांक और दिनांक क्या है?
– क्या यह व्यवस्था पूरे छत्तीसगढ़ में लागू है या कुछ विशेष परिस्थितियों तक सीमित है?
– चौहद्दी और बटांकन के लिए निर्धारित शासकीय शुल्क कितना है तथा उसकी रसीद दी जाती है या नहीं?
– यदि पक्षकार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर चुका है, तो बटांकन नहीं होने के आधार पर रजिस्ट्री रोकने का वैधानिक आधार क्या है?

लिखित नियम स्पष्ट हों, तभी दूर होगी पक्षकारों की परेशानी
जमीन की रजिस्ट्री आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी और आर्थिक प्रक्रिया है। ऐसे में आवश्यक दस्तावेजों, निर्धारित शुल्क और अतिरिक्त राजस्व अभिलेखों की जरूरत को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। सक्ती और डभरा के उप-पंजीयक कार्यालयों में चौहद्दी-बटांकन की कथित अनिवार्यता का लिखित आधार सामने आना चाहिए। यदि यह नियमों के तहत जरूरी है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए और यदि किसी मामले में इसकी आवश्यकता नहीं है, तो पक्षकारों को अनावश्यक प्रक्रिया मे उलझा कर परेशान करना क्यों?

इस संबंध में चैतन्य कुमार ठाकुर उप पंजीयन सक्ती डभरा से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here