अमन पथ न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू : नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, आत्मज्ञान भवन, आमापारा, बालोद में पांच देवियों माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ काली एवं माँ उमा की चैतन्य झांकी का भव्य उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बहन भारती कुलदीप (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव), डॉ. प्रीति अग्रवाल (महिला रोग विशेषज्ञ), आशा पटेल (पार्षद वार्ड नं 10) एवं बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी (संचालिका, ब्रह्माकुमारीज बालोद) के करकमलों से किया गया।
नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती इस अनूठी झांकी ने श्रद्धालुओं को देवी स्वरूपों के आध्यात्मिक रहस्यों को समझने तथा अपने जीवन में दैवी गुणों को धारण करने की प्रेरणा दी।
नारी शक्ति और संस्कारों का संदेश —
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने नवरात्रि पर्व की महत्ता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, पवित्रता, आत्मबल, सदाचार एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों को जागृत करने का संदेश देता है।
पांच देवियों के आध्यात्मिक रहस्यों से कराया परिचित —
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी नेहा दीदी ने पांचों देवियों के आध्यात्मिक रहस्यों को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं की महिमा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके दिव्य गुणों को जीवन में धारण करना ही सच्ची साधना है।
भारती कुलदीप ने कहा कि देवियों की झांकी से समझ आता है कि जीवन में साधना जरूरी है। आज हम शिक्षित तो हो रहे हैं, किंतु संस्कारों में कमी आ रही है, जिससे समाज में अपराध बढ़ रहे हैं। यह जानकर खुशी हुई कि बालोद में ऐसा स्थान है जहां मेडिटेशन के माध्यम से शिक्षा और संस्कार दोनों निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कहा कि हर स्त्री के अंदर दैवी शक्तियां विराजमान हैं, जिसे राजयोग के माध्यम से जागृत किया जा सकता है।
बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि झांकी के माध्यम से दिखाया गया है कि हमारी पांचों कर्मेन्द्रियां चंचल घोड़ों की तरह अनियंत्रित रूप से भागती हैं। राजयोग के माध्यम से स्वयं पर नियंत्रण पाकर दिव्य ऊर्जा से भरकर हम देवी-देवता बन सकते हैं। राजयोग की शिक्षा ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्रों पर पूर्णतः निःशुल्क दी जाती है।
21 अक्टूबर से राजयोग शिविर
गौरतलब है कि नवरात्रि के पश्चात 21 अक्टूबर से पांच दिवसीय राजयोग शिविर प्रारंभ होगा, जिसमें कोई भी भाई-बहन अपनी सुविधा के अनुसार प्रातः 7 से 12 बजे तक एवं शाम 5 से 8 बजे के बीच एक घंटे का चयन करके शिविर का लाभ ले सकते हैं।





