डोंगरगढ़ : छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी मंदिर की पंचमी भेंट इस बार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समन्वय और आदिवासी परंपराओं की मिसाल बनकर सामने आई। बस्तर से 15 आंगादेव और डांग लेकर पहुंचे आदिवासी समाज ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पंचमी भेंट की रस्म निभाई। इस बार मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग भी तैयार की गई, जो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।
कार्यक्रम में खैरागढ़ राजपरिवार, गोंड समाज और मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच समन्वय देखने को मिला। जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी में पूरा आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर मतभेद सामने आए थे। ऐसे में इस बार आपसी सहमति से पंचमी भेंट का संपन्न होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाल निवास से शुरू हुई पूजा-अर्चना
पंचमी भेंट कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर करीब तीन बजे खैरागढ़ राजपरिवार के डोंगरगढ़ स्थित राजमहल लाल निवास से हुई। यहां आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। इसके बाद शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित देवी-देवताओं के स्थानों पर पहुंचकर धार्मिक रस्में निभाई गईं। इस दौरान बस्तर से आए आंगादेव का भी स्वागत किया गया।
पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ पंचमी भेंट यात्रा निकाली गई। यात्रा में शामिल लोगों के साथ स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने भी आयोजन को देखा। धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक प्रस्तुतियों से शहर में उत्सव जैसा माहौल रहा।
बूढ़ादेव गुफा से मां बम्लेश्वरी मंदिर तक पहुंची यात्रा
पंचमी भेंट यात्रा सबसे पहले छीरपानी स्थित प्राचीन बूढ़ादेव गुफा पहुंची। यहां पूजा-अर्चना के बाद यात्रा आगे बढ़ी और मेला ग्राउंड से होते हुए नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर परिसर पहुंची। मंदिर ट्रस्ट समिति ने यात्रा का स्वागत किया।
बस्तर से 15 आंगादेव का पहुंचना और मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग तैयार किया जाना इस बार की पंचमी भेंट की प्रमुख विशेषताएं रहीं। गोंड समाज के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
आंगादेव और डांग की उपस्थिति ने आयोजन को पारंपरिक स्वरूप दिया। इस माध्यम से समाज अपनी धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है।
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष बोले- पारंपरिक यात्रा का स्वागत जारी रहेगा
मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने पंचमी भेंट यात्रा के स्वागत और आयोजन पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों की यात्रा का सभी ने उत्साह के साथ आनंद लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से आयोजन की रौनक बढ़ी।
उन्होंने कहा कि देवी के भक्तों और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का स्वागत किया जाता रहा है और आगे भी यह परंपरा जारी रहेगी। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी सामने लाते हैं।
राजपरिवार ने सभी पक्षों के सहयोग को सराहा
खैरागढ़ राजपरिवार के राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने आयोजन को सफल बनाने में गोंड समाज, मंदिर ट्रस्ट समिति और जिला प्रशासन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सभी समाजों को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है।
उन्होंने कहा कि पिछले आयोजनों के दौरान सामने आए मतभेदों को आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत और आपसी सहयोग से समाधान निकालना जरूरी है। राजकुमार ने मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, ट्रस्ट के सदस्यों, गोंड समाज और संतोष पडोती के सहयोग के लिए आभार जताया।
भवानी बहादुर सिंह के अनुसार, आयोजन ने यह संदेश दिया कि सभी समाज मिलकर अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर सकते हैं और आपसी मतभेदों को संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कामना की कि डोंगरगढ़ सहित पूरे छत्तीसगढ़ में भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बना रहे।
प्रशासन और पुलिस की निगरानी में संपन्न हुआ आयोजन
पंचमी भेंट को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने पहले से तैयारी की थी। आयोजन से पूर्व राजपरिवार, गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहमति बनाने का प्रयास किया गया था। तय किया गया कि मंदिर की प्रचलित व्यवस्था के साथ गोंड समाज की पारंपरिक पंचमी भेंट में भी सभी पक्ष सहयोग करेंगे।
पुलिस प्रशासन ने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए। राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने बताया कि प्रशासन और पुलिस ने आयोजन को लेकर पहले से तैयारी की थी। सभी पक्षों के सहयोग से मां बम्लेश्वरी की पूजा शांतिपूर्ण और आपसी सामंजस्य के साथ संपन्न हुई।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह मिल-जुलकर धार्मिक आयोजन किए जाते रहेंगे।
विवाद से सहयोग तक, परंपरा को आगे बढ़ाने की चुनौती
डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट इस बार धार्मिक परंपरा के साथ संवाद और सामाजिक समन्वय का संदेश देकर संपन्न हुई। पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति, गर्भगृह में प्रवेश और अलग-अलग पक्षों की भूमिका को लेकर मतभेद सामने आए थे। इस बार कार्यक्रम से पहले बातचीत के जरिए सहमति बनाने और आयोजन के दौरान सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बस्तर से आए 15 आंगादेव, मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग और राजपरिवार, गोंड समाज तथा मंदिर ट्रस्ट की भागीदारी इस आयोजन की खास विशेषताएं रहीं। अब चुनौती इस सहमति और आपसी सम्मान को आने वाले वर्षों में भी बनाए रखने की है, ताकि धार्मिक परंपराओं के साथ सभी समाजों के बीच विश्वास और सौहार्द मजबूत हो सके।




