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गर्भवती पत्रकार से कथित बदसलूकी मामले में राहुल गांधी को झटका, सुप्रीम कोर्ट 26-27 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

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नई दिल्ली : गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी के मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले से संबंधित याचिका और आवेदन पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया। इस पर अदालत ने कहा कि सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी किया जा चुका है। याचिका और आवेदन का नंबर उपलब्ध कराने के बाद मामले की सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर को की जाएगी।

12 अक्टूबर की घटना से जुड़ा है मामला

यह मामला 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर हुई उस घटना से जुड़ा है, जब राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर मार्च निकाला था। उस दौरान महिला पत्रकार रिचा विपक्षी नेताओं से प्रतिक्रिया लेने के लिए मौके पर मौजूद थीं।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे उन्हें चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए थे।

महिला पत्रकार ने लगाया हाथ पकड़कर गिराने का आरोप

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला पत्रकार रिचा ने आरोप लगाया कि वह राहुल गांधी से प्रतिक्रिया लेने के लिए आगे बढ़ीं, तभी उनका हाथ पकड़कर खींचा गया। उनके अनुसार, इस दौरान कैमरामैन को भी धक्का लगा और वह उनके ऊपर गिर गया, जिससे वह सीढ़ियों पर गिर गईं।

महिला पत्रकार ने दावा किया कि वह तीन महीने की गर्भवती हैं और घटना के बाद उन्हें सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भाजपा नेताओं ने इस घटना को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा और उनके सार्वजनिक बयानों तथा कथित व्यवहार के बीच विरोधाभास होने का आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मामले से जुड़े आवेदन पर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया। अदालत ने याचिका और आवेदन का नंबर नोट कराने को कहा तथा 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई की बात कही।

हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है। आगामी सुनवाई में अदालत संबंधित आवेदन पर विचार कर सकती है। सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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