कोरिया : छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती-किसानी का विशेष स्थान है। किसानों की खुशहाली प्रदेश की समृद्धि का आधार है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभकारी बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और खेती के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दे रही है। धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीक और सिंचाई सुविधाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
किसानों की भागीदारी और धान खरीदी में वृद्धि
प्रदेश में धान खरीदी के लिए पंजीकृत किसानों की संख्या और पंजीकृत रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2015 में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27.53 लाख हो गई। इसी अवधि में पंजीकृत रकबा 21.26 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। वर्ष 2015 में 59 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ था। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार से अधिक किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 33,431 करोड़ रुपये तथा होली पर्व से पहले आदान सहायता के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने का निर्णय भी लिया गया है। इससे किसानों को अपने नजदीक धान बेचने की सुविधा मिलेगी और परिवहन खर्च तथा समय की बचत होगी।
कृषक उन्नति योजना से आर्थिक संबल
किसान परिवार से आने वाले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी और समर्थन मूल्य के साथ कृषक उन्नति योजना की आदान सहायता मिलाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बनी है।
योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता खेती की लागत वहन करने, आगामी फसल की तैयारी और पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग प्रदान करती है। समय पर आर्थिक सहायता मिलने से किसान बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधनों की व्यवस्था बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
सम्मान निधि और फसल बीमा से सहायता
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों तक पहुंचा है। सीधे खाते में मिलने वाली राशि किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है। योजना के अंतर्गत 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रांश प्रीमियम प्राप्त हुआ है। फसल बीमा खेती से जुड़े जोखिमों के बीच किसानों को आर्थिक संरक्षण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यवस्था है।
फसल विविधीकरण से आय के नए अवसर
प्रदेश में धान के साथ दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। धान के स्थान पर दूसरी फसल लेने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये आदान सहायता देने का प्रावधान है तथा चयनित अन्य फसलों के लिए प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन सहायता का प्रावधान भी है। फसल विविधीकरण से किसानों को आय के वैकल्पिक अवसर मिल सकते हैं। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन मिट्टी और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग में भी सहायक हो सकता है। इससे खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
गन्ना उत्पादकों को बढ़ी हुई दर का लाभ
प्रदेश में चार प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं। इनमें कबीरधाम जिले के दो तथा बालोद और सूरजपुर जिले के एक-एक कारखाने शामिल हैं। गन्ना उत्पादकों के हित में खरीदी दर 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया गया है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की वृद्धि से गन्ना किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा।
आत्मनिर्भर किसान से समृद्ध छत्तीसगढ़
कृषि की समृद्धि केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान, सिंचाई, तकनीक और बाजार तक पहुंच भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
राज्य सरकार की किसान केंद्रित पहल का उद्देश्य खेती को मजबूत करना और ग्रामीण जीवन में आर्थिक स्थिरता लाना है। इन प्रयासों का लाभ किसानों तक समय पर पहुंचने से उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होगा तथा कृषि से समृद्धि की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को गति मिलेगी।




