अमनपथ न्यूज़ से उत्तम साहू दुर्ग : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित ‘आनंद सरोवर’ में विजयादशमी का पर्व आध्यात्मिक उमंग एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दुर्ग के विभिन्न सेवा केंद्रों से आए भाई-बहनों ने अपने जीवन की बुराइयों को त्यागकर श्रेष्ठ संस्कार अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में परंपरागत रावण दहन के स्थान पर एक अनूठी आध्यात्मिक पहल की गई। ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की संचालिका रीटा दीदी ने सभी से आह्वान किया कि वे अपने जीवन के उन अवगुणों को पहचानें, जिन्हें छोड़ना चाहते हैं और उन्हें कागज पर लिखकर परमात्मा के सम्मुख दृढ़ संकल्प करें। इसके बाद सभी भाई-बहनों ने अपने हस्तलिखित अवगुणों की पर्चियों को हवन की अग्नि में स्वाहा कर बुराइयों से मुक्त होने तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया।
रीटा दीदी ने विजयादशमी का आध्यात्मिक रहस्य स्पष्ट करते हुए कहा कि रावण बुराइयों और विकारों का प्रतीक है, जबकि राम परमात्मा की श्रेष्ठता एवं दिव्य गुणों का प्रतीक हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, नफरत, छल-कपट, जिद और आलस्य रूपी दस विकार ही मनुष्य के भीतर का रावण हैं। जब हम परमात्मा के ज्ञान और मेडिटेशन के माध्यम से उनसे जुड़ते हैं, तो शांति, सुख, प्रेम, आनंद, पवित्रता, शक्ति और ज्ञान जैसे सात दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों के भीतर के रावण को देखने के बजाय अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करना ही विजयादशमी का सच्चा संदेश है।
वरिष्ठ राजयोगी शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी ने कहा कि परमात्म ज्ञान हमें अपने विकारों को पहचानने और उन्हें जड़ से समाप्त करने की शक्ति देता है। राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से आत्मा परमात्मा से शक्ति प्राप्त कर अपने संस्कारों को श्रेष्ठ बना सकती है। जब हम अपने भीतर की नकारात्मकता को समाप्त कर पवित्रता और दिव्यता को धारण करते हैं, तभी जीवन में सच्चा परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि अपने अंदर के रावण पर विजय प्राप्त करना ही सच्चा आध्यात्मिक पुरुषार्थ है। इसके पश्चात मनाई जाने वाली दीपावली आत्मा में ज्ञान और दिव्य गुणों का प्रकाश जगाने का प्रतीक है।
इस प्रकार आनंद सरोवर में मनाया गया विजयादशमी पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, आत्मपरिवर्तन और बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का प्रेरणादायी संदेश बन गया।




