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छह मौतों के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने घेरा

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केल्हारी बस हादसे और छिंदिया-पटना मार्ग की दुर्घटना के बाद उठी जवाबदेही की मांग, ओवरलोडिंग, फिटनेस और परमिट जांच पर सवाल

बैकुंठपुर (कोरिया) :  जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में जा रही लोगों की जान ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केल्हारी मार्ग पर बस दुर्घटना में छह लोगों की मौत और इससे पहले छिंदिया-पटना मार्ग पर ऑटो दुर्घटना में चार लोगों की जान जाने के बाद जिला कांग्रेस कमेटी कोरिया के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी सक्रियता और जवाबदेही को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में परिवहन नियमों के पालन और वाहनों की निगरानी को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावी नजर नहीं आ रही है।

प्रदीप गुप्ता ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल हादसे भर नहीं हैं, बल्कि इनसे यात्री सुरक्षा, वाहनों की तकनीकी स्थिति और परिवहन नियमों के पालन की व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी हो जाती है। जब जिले में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हों और लोगों की जान जा रही हो, तब यह जानना आवश्यक है कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों की नियमित जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है। ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

ओवरलोडिंग से लेकर फिटनेस तक, निगरानी व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिले में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर वाहन चलाने, स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने, बिना वैध परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र के वाहन संचालित करने तथा पिकअप वाहनों में निर्धारित सीमा से अधिक सामान लादकर परिवहन करने जैसी शिकायतों पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।

उन्होंने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन और अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण की आवश्यकता भी उठाई। उनका कहना है कि परिवहन नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हादसे के बाद चिंता नहीं, पहले हो प्रभावी कार्रवाई

प्रदीप गुप्ता ने सवाल उठाया कि यदि सड़कों पर ओवरलोडिंग और अन्य परिवहन नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी रोकथाम के लिए विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्या वाहनों की नियमित जांच की जा रही है? कितने वाहनों के परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्रों की जांच हुई है? नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कितनी कार्रवाई की गई है?

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के मामले में केवल दुर्घटना के बाद चिंता जताना पर्याप्त नहीं है। संभावित खतरे की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना अधिक महत्वपूर्ण है। परिवहन विभाग को नियमित जांच अभियान चलाकर यात्री वाहनों की क्षमता, फिटनेस और परमिट की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि नियमों की अनदेखी के कारण यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि, जवाबदेही तय करने की मांग

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विभाग की जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सड़कों पर उतरकर नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। नियमित निरीक्षण, ओवरलोडिंग पर रोक और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई से ही सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

अब कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करने की जरूरत

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था और सड़क सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। विभाग को यह बताना चाहिए कि जिले में वाहनों की जांच, फिटनेस प्रमाणपत्रों के सत्यापन, परमिट की जांच और ओवरलोडिंग रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही, भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

केल्हारी और छिंदिया-पटना मार्ग की दुर्घटनाओं के बाद सड़क सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अब जरूरत केवल सवाल उठाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की प्रभावी निगरानी, नियमित कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है, ताकि सड़क पर सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन सके।

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