संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामरतन सिन्हा का जन्म 1 जून 1921 मे ग्राम साकरा मे हुआ था उनके पिता का नाम पीलाराम सिन्हा था वे कृषि कार्य करते थे रामरतन सिन्हा केवल चौथी तक पढाई किये थे उसके बाद उनके उपर स्वतंत्रता का जुनून को प्रभावशाली उग्रवादी नेता सुखराम नागे ने प्रज्वलित किया जो जल जंगल जमीन के अधिकारो के लिये संघर्ष किया नेज के समर्पन से प्रभावित होकर सिन्हा ने स्वतंत्रता संग्राम मे शामिल हो गये और कंडेल सत्याग्रह मे सक्रिय रूप से भाग लिया एक आदोलन जिसका उद्देश्य लोगो के अधिकारो को पुनः प्राप्त करना था 12मार्च 2013 को उनका निधन हो गया जहा उनके परिजन आज ग्राम मे स्वागत गेट या स्कूल को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नामकरण की माग करते आ रहे रहे
ग्राम साकरा निवासी रामरतन सिन्हा के नाती चंपेश्वर सिन्हा व हितेश सिन्हा अटल भारतीय हिन्दू फाउण्डेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने अपने दादा के देश सेवा की इतिहास बताते हुए बताया की रामरतन सिन्हा स्वतंत्रता मे अंतिम चरण उनके भागीदारी के चलते उन्हे रायपुर सेन्ट्रल जेल मे कैद किया गया जहा उन्होने चार महीने की सजा काटी भारत की अजादी के बाद उन्होने खुद को सार्वजानिक सेवा के लिये समर्पित कर दिया और 1952 से 1962 तक जिला सदस्य के रूप मे कार्य किया 17 फरवरी 1969 मे उन्होने नगरी मंडी स्थापना मे अहम भूमिका निभाई और इसके संस्थापक सदस्यो मे एक बने उन्होने अपने समुदाय के प्रति अटूट समर्पन प्रदर्शित करते हुए 1962 से 1978 तक ग्राम पंचायत साकरा के सरपंच के रूप मे कार्य करके उल्लेखनिय यात्रा जारी रखा राज्य सरकार ने उनके उल्लेखनिय कार्यो को देखते हुए 15 अगस्त 1997 को प्रस्सति पत्र देकर उन्हे सम्मानित किया 12 मार्च 2013 को रामरतन सिन्हा का निधन हो गया जिसके बाद से परिजन हमेशा मांग करते आ रहे की ग्राम साँकरा के स्वागत गेट या किसी स्कूल को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामरतन सिन्हा के नाम पर नामकरण किया जाये ताकी आने वाले पिढी भी उनके नाम को याद रखे और गर्व के साथ ये कहे की देश की अजादी मे अहम भूमिका निभाने वाले सेनानी हमारे गांव की गौरव है और उनकी बलिदान को हमेशा याद किया जाये।




