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प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति को दर्शाती है : मूलचंद शर्मा

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साजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की विवादित टिप्पणी ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सह मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक शालीनता और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के विपरीत बताया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। ” लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई विचारों से और नीतियों की लड़ाई नीतियों से लड़ी जाती है, न कि किसी के परिवार और दिवंगत परिजनों को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनाकर। ” देश के प्रधानमंत्री की नीतियों से असहमति हो सकती है, सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए जा सकते हैं और विपक्ष को सरकार की आलोचना करने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर भाषा की मर्यादा को लांघना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला है। ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति के शब्दों का प्रभाव व्यापक होता है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे राजनीतिक बहस को गरिमा प्रदान करें, न कि ऐसी टिप्पणियां करें जिनसे अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो। सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा के साथ-साथ भाषा की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

मूलचंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक विरोध करना अलग बात है, लेकिन उनके दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी करना राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाने जैसा है। स्वस्थ लोकतंत्र में आलोचना तथ्यों, नीतियों और जनहित के मुद्दों पर होनी चाहिए। राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत टिप्पणियों में बदलने से लोकतांत्रिक संवाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या राजनीतिक विरोध के लिए अब मर्यादाओं को पीछे छोड़ दिया जाएगा? देश की जनता नेताओं से विकास, रोजगार, किसानों की समस्याओं, महंगाई और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस की अपेक्षा करती है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं को अपने वक्तव्यों के माध्यम से जिम्मेदार राजनीतिक आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। भाजपा नेता ने मांग की कि मल्लिकार्जुन खरगे अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें और भविष्य में राजनीतिक संवाद की मर्यादा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोध स्थायी हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शालीनता और सम्मान का स्थान हमेशा बना रहना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खरगे की टिप्पणी सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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