Home छत्तीसगढ़ भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक: जैन समाज ने मनाया धूमधाम से

भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक: जैन समाज ने मनाया धूमधाम से

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कोरिया/ बैकुंठपुर :  भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर बैकुंठपुर स्थित जैन मंदिर में जैन समाज ने विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया। इस अवसर पर भव्य रैली का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोग, विशेषकर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग, उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर स्वामी की मंगल आरती और पूजा से की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक भाग लिया। इसके बाद, जैन समाज ने रैली का आयोजन किया, जो नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। इस रैली का मुख्य उद्देश्य “अहिंसा परमोधर्म” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना था। रैली में शामिल लोगों ने शांति और सद्भावना का संदेश फैलाया, जिससे समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिला।

इस अवसर पर इंदरचंद ललवानी, इंदरचंद बैंद, आर के जैन, जगत बैंद, हरीश ललवानी, रमेश जैन, जयचंद ललवानी, पवन जैन और कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों और उनके द्वारा दिए गए जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। इंदरचंद ललवानी ने कहा, “भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि हमें दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति रखनी चाहिए। हमें ‘जीयो और जीने दो’ के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।”

रैली के दौरान समाज के बच्चों और युवा वर्ग ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। उनमें से एक युवा प्रतिभागी, मयंक जैन ने कहा, “यह रैली हमें अहिंसा और प्रेम का पाठ पढ़ाने के लिए है। हमें अपने समाज में इन मूल्यों को फैलाना चाहिए।” महिला मंडल की महिलाएं और युवतियों ने भी रैली में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

जैन समाज के इस आयोजन ने केवल धार्मिक आस्था को उजागर नहीं किया, बल्कि समाज में शांति और सद्भावना को बढ़ावा देने का भी कार्य किया। कार्यक्रम में शामिल सभी ने मिलकर एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया, जिससे यह स्पष्ट था कि जैन समाज महावीर स्वामी के सिद्धांतों को अपने जीवन में ढालने के लिए प्रतिबद्ध है।

अंत में, भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन था, बल्कि यह सामाजिक एकता और सद्भावना का प्रतीक भी बना। जैन समाज ने इस पावन अवसर पर जो संदेश फैलाया, वह सभी के लिए प्रेरणादायक और सार्थक सिद्ध हुआ।

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