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गरियाबंद ज़िले के मैनपुर, देवभोग, पैलीखंड एवं सेंधमुड़ा क्षेत्र की धरती पर गड़े बहुमूल्य रत्न – हीरा एवं एलेक्जेंडर – के त्वरित दोहन की नितांत आवश्यकता

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राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद :  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले के मैनपुर, देवभोग, पैलीखंड और सेंधमुड़ा क्षेत्र की धरती न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि भूगर्भीय संपदा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों एवं खनिज विशेषज्ञों की रिपोर्टों में यह प्रमाणित हुआ है कि इन क्षेत्रों की भूमि के गर्भ में बहुमूल्य रत्न – विशेषकर हीरा तथा दुर्लभ एलेक्जेंडर (Alexandrite) – अच्छी मात्रा में मौजूद हैं।

इन प्राकृतिक निधियों का त्वरित, वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से दोहन न केवल छत्तीसगढ़ राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकता है, बल्कि स्थानीय विकास, स्वरोजगार, पलायन की रोकथाम और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में भी अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकता है।

प्रमुख आवश्यकताएँ:

1. भू-वैज्ञानिक पुनः सर्वेक्षण: केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में विस्तृत खनिज सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए।

2. राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्राथमिकता: मैनपुर, देवभोग, पैलीखंड और सेंधमुड़ा क्षेत्र को विशेष खनिज क्षेत्र घोषित कर त्वरित विकास योजनाएं बनाई जाएं।

3. स्थानीय सहभागिता: खनन कार्यों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले तथा ग्रामसभा की सहमति से कार्य हों।

4. पर्यावरणीय संरक्षण: खनिज दोहन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन हेतु सावधानीपूर्वक योजना बनाई जाए।

आज जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है, तब गरियाबंद ज़िले के ये क्षेत्र – जो अब तक उपेक्षित रहे हैं – राष्ट्रीय खनिज मानचित्र पर अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज करवा सकते हैं। यह समय है कि इन बहुमूल्य रत्नों की पहचान, सुरक्षा एवं दोहन हेतु त्वरित कदम उठाए जाएं।

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