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मंजिल तक पहुंचने रास्ते भी खुद रास्ते तलाश रहे हैं – ससाकालो गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : प्रदेश सरकार विकास के लाख दांवे कर ले मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सड़क, बिजली पानी, जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सरगुजा जिले के जंप लखनपुर के सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत लिपगी के आश्रित ग्राम ससकालो में बसारत करने वाले ग्रामीण आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी सड़क पुलिया जैसी सुविधाओं की बांट जोह रहे हैं। रास्ते भी मंजिल तक पहुंचने रास्ते तलाश रहे हैं।दरअसल ग्राम पंचायत लिपगी के ससकालो गांव में विशेष पिछड़ी आदिवासी जनजाति के लोग निवास करते हैं। मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मुहल्ले वासियों कोगांव से निकल कर ब्लाक मुख्यालय तक पहुंचने 20 किलोमीटर की दूरी घूमकर तय करना पड़ता है।नदी से होकर गुजरने वाले
रास्ते की दूरी काफी कम हो जाती बशर्ते कि नदी में पुल बन जाये।

गर्मी और ठंड के सीजन में जैसे तैसे सफर कट जाती परंतु बरसात के दिनों में मुहल्ले वासियों की परेशानी काफी बढ़ जाती है। लोग घूमकर आना जाना करते हैं। कम दूरी वाले नदी के रास्ते अपनी जान जोखिम में डाल नदी पार कर ब्लाक मुख्यालय तक का सफर किसी तरह तय करते है। ग्रामीणों ने अपने बसाहट तक आने जाने सड़क तथा नदी पार करने पुलिया बनाने की मांग प्रशासन से किया है।नदी में पुलिया तथा बस्ती तक सड़क बन जाने से ब्लाक मुख्यालय तक पहुंचने की दूरी काफी कम हो जाएगी।
काबिले गौर है कि बरसात के सीजन में बीमार ग्रस्त लोगों गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने ले जाने में ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यदि सड़क के साथ नदी पर पुल बन जाता है तो इसका लाभ क्षेत्रवासीयो को मिल सकता है।
अब देखने वाली बात होगी कि ग्रामीणो की मांग पर सड़क पुलिया की सुविधा मिल पाती है या नहीं वक्त पर मालूम हो सकेगा। एक बात तो साफ है कि- प्रदेश सरकार के ग्रामीण इलाकों में विकास किये जाने के सभी दावे ग्राम ससाकालो में मिथ्या साबित होकर दम तोड रही है।प्रदेश सरकार की विकास करने के हकीकत ग्राम ससकालो में सिमटती नजर आ रही है। सड़क तथा नदी पर पुल बनाये जाने की मांग ससाकालो गांव के निवासी कंचन, आनंद दुलार साय, बहाल साय, बंधन ने किया है। ताकि आवागमन सुलभ हो सके।

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