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कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी, भारत को क्यों नहीं हो रही बड़ी चिंता?

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14 जून2025:- ईरान और इजराइल के बीच वॉर फिर से शुरू हो गई है, जिसके चलते पूरी दुनिया में तनाव का माहौल बना हुआ है, जिसका असर भारतीय बाजार के साथ-साथ अमेरिकी बाजार पर देखने को मिला. क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की है. दुनियाभर में जहां क्रूड आयल की कीमतें बढ़ने से हाहाकार मचा हुआ है, वहीं भारत इस बात से फ़िलहाल बेफिक्र है. आइए कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी के बावजूद भी भारत टेंशन में क्यों नहीं है?

पेट्रोलियम मंत्री ने बताई वजह:- पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और चौथे सबसे बड़े गैस खरीदार भारत के पास आने वाले महीनों के लिए तेल एवं गैस की पर्याप्त आपूर्ति है. इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ उन्होंने यह बात कही. मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उन्होंने भारतीय तेल उद्योग के प्रमुखों के साथ ऊर्जा उपलब्धता परिदृश्य की नियमित समीक्षा की.उन्होंने कहा, ”भारत की ऊर्जा रणनीति ऊर्जा की उपलब्धता, किफायत और स्थिरता को सफलतापूर्वक साधने पर आधारित है. हमारे पास आने वाले महीनों के लिए पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति है.” इजराइल के ईरान पर हमला करने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जनवरी के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं.

10 फीसदी बढ़ी क्रूड ऑयल की कीमतें:- हमले की खबर सामने आने के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड की दर में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट हुई. ब्रेंट 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा जो बृहस्पतिवार के बंद भाव से पांच प्रतिशत से अधिक है. इज़राइल-ईरान के बीच तनाव से तेल की कीमतों में 8% की तेजी जरूर आई है, लेकिन अभी यह भारत की अर्थव्यवस्था या उपभोक्ताओं की जेब पर गहरी चोट नहीं रही है. तेल की आपूर्ति बनी हुई है, डीलरों के मार्जिन पर भले दबाव बढ़े, लेकिन स्थानीय रिटेल कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है

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