
इस साल आषाढ़ अमावस्या का पर्व 25 जून दिन बुधवार को है. इस दिन दर्श अमावस्या भी होगी. पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 24 जून को शाम 6:59 बजे से शुरु होगी और यह 25 जून को शाम 4 बजे तक रहेगी. आषाढ़ अमावस्या का स्नान, दान, पूजा आदि 25 जून मंगलवार को होगा. इस साल आषाढ़ अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सवा पांच घंटे तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 5 बजकर 25 मिनट से सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक है. आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों के लिए पूजा, तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि करते हैं, इससे पितर खुश होते हैं. आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के दीपक भी जलाते हैं. आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के लिए दीप कब जलाना चाहिए, दिन में, शाम को या रात में? दीप जलाने की सही विधि क्या है?
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों को करें तृप्त:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं ताकि वे अपने वंश से तृप्त हो सकें. वे अपने वंश से उम्मीद करते हैं कि वे आषाढ़ अमावस्या के दिन उनके लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान आदि करेंगे. इन कार्यों से पितर खुश होते हैं. जो लोग ये कार्य नहीं करते हैं, उनके पितर नाराज होते हैं. इस वजह से उनको पितृ दोष लगता है.
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के लिए दीपक जलाने का समय:- धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं और शाम के समय में सूर्य के ढलने पर वे वापस पितर लोक लौटने लगते हैं. धरती से वापस लौटते समय उनको रास्ते में परेशानी न हो, इसके लिए दीपक जलाते हैं. पितरों के लिए दीपक शाम को उस समय जलाना चाहिए, जब सूर्य ढल गया हो और अंधेरा हो रहा हो. मान्यता है कि पितर लोक लौटते समय पितरों के मार्ग में अंधेरा न रहे, इसलिए अमावस्या की शाम उनके लिए दीपक जलाते हैं.
दीप जलाने का मंत्र
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥



