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Puri Rath Yatra Stampede: DM-SP का तबादला, DCP और कमांडेंट निलंबित, मुआवजे का ऐलान

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ई दिल्ली :  विश्व-प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर के पास रविवार तड़के मची भगदड़ में कम-से-कम तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई और लगभग 50 लोग घायल हो गए।

हादसा सुबह 4 से 5 बजे के बीच तब हुआ, जब लाखों भक्त दर्शन के लिए सरधाबली क्षेत्र में उमड़े थे। भीड़ की अफरा-तफरी ने देखते-देखते जानलेवा रूप ले लिया।

सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की

हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का ऐलान किया। पुरी के जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक का तत्काल तबादला कर दिया गया, जबकि ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में डीसीपी विष्णु प‍ति और कमांडेंट अजय पाधी को निलंबित कर दिया गया। चंचल राणा नए ज़िलाधीश और पिनाक मिश्रा नए एसपी बनाए गए हैं। साथ ही विकास आयुक्त की निगरानी में उच्च-स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

परिजनों को 25 लाख की राहत

मुख्यमंत्री कार्यालय ने घोषणा की कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। घायलों का इलाज सरकारी खर्च पर कराया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह मुआवजा सांत्वना भर नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने की वचनबद्धता का हिस्सा भी है।

मुख्यमंत्री का माफीनामा

मुख्यमंत्री माझी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सभी जगन्नाथ भक्तों से क्षमा मांगी। उन्होंने लिखा कि ”महाप्रभु के दर्शन की उत्कंठा में हुई धक्का-मुक्की से यह दु:खद घटना घटी; मैं और मेरी सरकार क्षमा प्रार्थी हैं।” साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा में हुई किसी भी चूक की गहन जांच होगी और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा।

विपक्ष ने साधा निशाना

भाजपा-शासित राज्य सरकार के कदमों पर विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने सवाल उठाए हैं। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि लगातार दूसरे दिन भीड़ प्रबंधन की विफलता ने सरकार की ”अक्षम तैयारियों” को उजागर किया है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी घटना को ”अक्षम्य लापरवाही” बताते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई और राहत कार्य तेज़ करने की मांग की।

घटना का महत्त्व

पुरी रथयात्रा आठ दिन चलने वाला ऐसा उत्सव है जिसमें हर साल 25-30 लाख श्रद्धालु भाग लेते हैं। प्रशासन ने इस बार 10,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती और अलग-अलग भीड़ मार्ग बनाने की योजना बनाई थी, फिर भी रविवार को यातायात नियंत्रण में चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ‘रियल-टाइम’ भीड़ सेंसर, डिजिटल टिकटिंग और स्वचालित बैरिकेडिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाएँ अनिवार्य होंगी।

आगे क्या?

जांच रिपोर्ट:- विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति 15 दिन में प्राथमिक रिपोर्ट देगी। सुरक्षा सुधार:- मंदिर प्रशासन और पुलिस संयुक्त कार्ययोजना तैयार करेंगे ताकि वाहन-प्रवेश, आपात निकास और चिकित्सा सहायता के स्पष्ट मानक बन सकें। श्रद्धालुओं का भरोसा:- स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएँ घायलों और मृतकों के परिवारों को मनोवैज्ञानिक सहारा देने के लिए हेल्पलाइन शुरू कर रही हैं।

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