
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : मातमी पर्व मुहर्रम के मौके पर आने वाले दुल्ला बाबा सवारी का अद्भुत नजारा देखने 3 जुलाई दिन गुरुवार की रात प्राचीन इमाम बाड़ा में मुस्लिम समुदाय तथा दूसरे कौम के लोगों की भीड लगी रही। अपनी मुरादे लेकर हर सवाली दुल्ला बाबा के दरबार में हाजिर रहा।दरअसल लखनपुर में दुल्ला बाबा सवारी आने के बारे में लिखी कोई किताब तो नहीं है अलबत्ता इतिहास काफी पुराना रहा है। कहते हैं इनके दरबार से कोई खाली नहीं लौटता।पुराने जमाने से नाले अरधात तथा नाले हैदर के नाम से मुस्लिम कौम के लोगों को यह सवारी आती रही है।मौजूदा वक्त में मो0 फरीद खान तथा मो0 जाकीर हुसैन नाल पकड़ते हैं तथा इनको यह सवारी आती है।

हैरान करने वाली बात है कि दुल्ला बाबा की सवारी दहकते आग के अवाला से खेलते है जो अपने आप में काफी दिलचस्प होता है। अपनी मुरादे लेकर मन्नत मानने, जादू टोना टोटका की झाड़ फूंक कराने लोग बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। यह सवारी हर साल मुहर्रम के सीजन में ही आती है।इनकी खासियत रही है इनके दर पर आकर मांगने वाले की सभी तमन्नाएं पूरी होती है कोई मायूस नहीं लौटता।दुल्ला बाबा सवारी से जुड़ी अनेक प्रचलित दास्तां आज भी कहे सुने जाते हैं। जनश्रुति से पता चलता है पहले भी कई मुस्लिम समुदाय के लोगों को यह सवारी आती थी। ओ आज दुनिया में नहीं है।फिलहाल लोग बरसते पानी में भी पूरे शिद्दत के साथ ईमाम बाड़ा पहुंचे निकलने वाली दुल्ला बाबा सवारी के अद्भुत नजारा को देखा।
अपने चमत्कारी कारनामे के लिये दुल्ला बाबा की सवारी इलाके में मशहूर रहे है।
रियासत काल से मुहर्रम के मौके पर लखनपुर में दुल्ला बाबा सवारी आने की रिवायत रही है जो आज भी चलन में है। यह सवारी सातवीं नवमी तथा दसवीं तिथि रोजे पहलाम को आती है। दुल्ला बाबा की सवारी सबके लिए आस्था का केंद्र बिंदु रहा है। बताया जाता है इस तरह की सवारी और कहीं भी नहीं आती है।



