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3 लाख 27 हजार 945 राशनकार्डधारियों का अता-पता नहीं, अब विभाग ने दी चेतावनी…

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रायपुर :  राज्यभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था में बड़ी खामी उजागर हुई है. 3 लाख 27 हजार 945 राशनकार्डधारियों का अता-पता नहीं, यही कारण है कि अब विभाग ने सत्यापन कराने की अपील की है. वहीं बिलासपुर जिले के 21 हजार 992 कार्डधारियों का महीनों से कोई पता नहीं चल रहा है. वे ऐसे कार्डधारी हैं जिन्होंने 6 से 18 महीनों तक एक बार भी सरकारी राशन नहीं उठाया है. खाद्य विभाग ने अब इन कार्डधारियों को अंतिम मौका देते हुए सत्यापन कराने की अपील की है. समय रहते यदि कार्डधारी दुकान जाकर अपना सत्यापन नहीं कराते हैं तो राशन कार्ड से हाथ धोना पड़ सकता है.

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में लगभग 6 लाख राशन कार्डधारी हैं, जिनके माध्यम से करीब 17 लाख सदस्य हर महीने सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन हाल ही में हुई जांच में यह सामने आया कि जिले के 2 हजार से अधिक लोग पिछले 6 साल से डेढ़ साल के दरमियान बिना किसी सूचना के राशन नहीं ले रहे हैं. विभाग का मानना है कि इन निष्क्रियता के पीछे डुप्लीकेट आधार, उम्रदराज सदस्यों का निधन, उनके घर में 18 वर्ष से ऊपर कोई बालिग सदस्य न होना या आधार अपडेट न होना जैसे कारण हो सकते हैं. खाद्य विभाग ने ऐसे कार्डधारियों की सूची संबंधित पीडीएस दुकानदारों को सौंप दी है और निर्देश दिया है कि वे लाभार्थियों से संपर्क कर जल्द से जल्द उनका स्थानीय सत्यापन कराएं. विभाग के इस पहल से यह माना जा रहा है कि यदि निर्धारित अवधि में सत्यापन नहीं कराया गया, तो ऐसे राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे और संबंधित सदस्यों को राशन वितरण सूची से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा.

निष्क्रय कार्डधारियों की पहचान के लिए राज्य स्तर पर सत्यापन अभियान शुरू किया गया है. खाद्य विभाग के अनुसार ऐसे लगभग 3 लाख 27 हजार 945 राशनकार्डधारी हैं जिन्होनें कई महीनों से राशन का उठाव नही किया है. पीडीएस दुकानों को सूची सौंपकर वेरीफिकेशन कराने के निर्देश दिए हैं.

खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निष्क्रिय कार्डधारियों द्वारा राशन नहीं उठाने से उनके हिस्से का खाद्यान्न पीडीएस दुकानों में शेष बच रहा है. ऐसे में राशन वितरण में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही, लेकिन कार्डधारियों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या संपर्क नहीं मिल रहा है. यह स्थिति भविष्य में प्रणाली की पारदर्शिता और लाभार्थियों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर सकती है.

 

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